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सावन के महीने में हाथ में कलावा बांधकर मुस्लिम चलाते हैं दुकान : गिरिराज सिंह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने मुस्लिमों को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि सावन के महीने में मुसलमान दुकानदार हाथ में कलावा बांधकर दुकान चलाते हैं. सावन के महीने में कारोबारी मकसद से मुस्लिम समाज के दुकानदार ऐसा करते हैं. गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रशासन को इस संबंध में कार्रवाई भी करनी चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से लड़ाई-झगड़े होने की संभावना भी बनी रहती है.

गिरिराज सिंह ने शनिवार (6 जुलाई) को मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, “देखिए, सावन में पूरे देश में फिर वो अयोध्या हो या बनारस (वाराणसी) या फिर कोई भी क्षेत्र हो, हाथ में कलावा बांधकर खुद को हिंदू की तरह दिखाते हुए वो दुकान खोलते हैं. ज्यादातर वो लोग मुस्लिम समाज के दुकानदार होते हैं. इसकी वजह से कई बार झड़गा-फसदा होने की नौबत आती है. मैं प्रशासन से अपील करता हूं कि वह इस पर कार्रवाई करे. मुस्लिमों को भी चाहिए कि वे ऐसा नहीं करें, जिससे हिंदू धर्म भी बाधित हो.”

देश को इस्लामिक स्टेट और गजवा-ए-हिंद बनाने की कोशिश: गिरिराज सिंह

ऐसा नहीं है कि गिरिराज सिंह ने इस तरह का बयान पहली बार दिया है. वह पहले भी कई मौकों पर मुस्लिमों के खिलाफ विवादित बयान दे चुके हैं. जब जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने चुनावी जीत के बाद कहा था कि वह मुस्लिमों के लिए काम नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें इस समुदाय का वोट नहीं मिला है, तब गिरिराज उनके समर्थन में नजर आए थे. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि बीजेपी नेता ने आगे बढ़कर आग में घी डालने वाला बयान तक दे दिया था.

गिरिराज सिंह ने विपक्ष को निशाने पर लेते हुए 19 जून को बयान दिया था कि ये लोग देश को इस्लामिक स्टेट और गजवा-ए-हिंद में तब्दील कर रहे हैं. मुस्लिम हमें वोट नहीं कर रहा है, ऐसा जहर क्यों है? अगर इसे जहर माना जा रहा है तो हम इस जहर के फन को तोड़ने का काम करेंगे. कुल लोग देश को इस्लामिक स्टेट और गजवा-ए-हिंद बनाना चाहते हैं. विपक्षी दल इसमें आगे हैं. कांग्रेस और आरजेडी इस काम में सबसे ज्यादा आगे नजर आ रहे हैं.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।