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कंगना रनौत घड़ियाली आंसू बहाकर हिमाचल प्रदेश से वापस चली गईं : जगत सिंह नेगी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

शिमला. शिमला. हिमाचल प्रदेश की मंडी से सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) इन दिनों विपक्ष के निशाने पर हैं. मामला राज्य में प्राकृतिक आपदा से जुड़ा है. हिमाचल विधानसभा में यह मुद्दा उठा तो राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी (Minister Jagat Singh Negi)  कंगना पर बुरी तरह से बरस पड़े. उन्होंने बीजेपी आलाकमान, जयराम रमेश के साथ ही कंगना पर भी जमकर निशाना साधा. जगत सिंह नेगी ने विपक्ष की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि समेज में इतनी बड़ी आपदा आई है. समेज कंगना का संसदीय क्षेत्र है, इसके बाद भी वह वहां गईं तक नहीं.

कंगना पर जगत सिंह नेगी का विवादित बयान

जगत सिंह नेगी ने विवादित बयान देते हुए कहा कि कंगना अपना मेकअप धुलने और असली चेहरा सामने आने के डर से प्राकृतिक आपदा के दौरान मंडी और कुल्लू नहीं पहुंचीं. उन्होंने कहा कि बीजेपी सासंद कंगना आपदा के छह दिन बाद वहां आईं और घड़ियाली आंसू बहाकर वापस चली गईं.

“कंगना को था मेकअप धुलने के डर…”

राजस्व मंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि संसदीय क्षेत्र होने के बाद भी कंगना आपदा के समय वहां गईं नहीं बल्कि उन्होंने सिर्फ एक ट्वीट कर दिया. उस ट्वीट में उन्होंने कहा कि येलो और ऑरेंज अलर्ट होने की वजह से उन्होंने अधिकारियों और नेताओं को वहां नहीं जाने की सलाह दी है.

“आपदा के समय नहीं आईं कंगना रनौत”

जगत सिंह नेगी ने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि बीजेपी सासंद कंगना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा तब किया जब वहां सब कुछ ठीक हो चुका था, अगर वह आपदा के समय ही वहां पर आतीं तो उनका मेकअप खराब हो जाता. फिर ऐसा लगता है कि ये कंगना नहीं बल्कि उनकी मां यहां आई हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनको समेज न जाने की सलाह जयराम रमेश ने ही दी होगी.

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बारिश और बाढ़ ने जमकर मचाई तबाही

हिमाचल में बारिश और बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई. इन हादसों में कई लोगों की जान चली गई वहीं बहुत से लोग बेघर हो गए. मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत उस दौरान आपदाग्रस्त इलाकों के दौरे पर पहुंची थीं. उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना था. लोगों से मिलते कंगना की कई तस्वीरें और वीड़ियो सामने आए थे. लेकिन कांग्रेस नेता का कहना है कि कंगना उन इलाकों के दौरे पर वक्त पर गई ही नहीं. वह सब कुछ ठीक होने के बाद वहां पहुंची थीं.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।