गुरुवार, सितंबर 10 2026 | 03:09:03 PM

जम्मू-कश्मीर में उत्तर प्रदेश के व्यक्ति को मारी गई गोली

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. जम्मू-कश्मीर में एक और आतंकी हमला हुआ है। इस बार आतंकियों ने पुलवामा में गैर कश्मीरी को निशाना बनाया है। गोली लगने से मजदूर घायल हो गया है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत खतरे से बाहर है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल इलाके में गुरुवार सुबह आतंकवादियों ने उत्तर प्रदेश के एक मजदूर को गोली मारकर घायल कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि बिजनौर निवासी प्रीतम सिंह को बटागुंड गांव में आतंकवादियों ने गोली मार दी, मजदूर के हाथ में गोली लगी है। प्रीतम सिंह को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। पिछले एक सप्ताह में कश्मीर में गैर-स्थानीय मजदूरों पर लगातार हमले हो रहे है।

गांदरबल में सुरंग बना रही कंपनी के कैंप पर हमला

इससे पहले, गांदरबल में श्रीनगर-लेह हाईवे पर सोनमर्ग के पास गगनगीर इलाके में जेड मोड़ सुरंग निर्माण कर रही कंपनी में कार्यरत प्रवासी मजदूरों पर रविवार की रात आतंकियों ने हमला कर एक डॉक्टर और छह मजदूरों की हत्या कर दी थी। मारे गए मजदूरों में कश्मीरी और गैर कश्मीरी दोनों हैं। प्रवासी मजदूरों पर हाल के वर्षों का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है। आतंकी दो बताए जा रहे हैं। यह वारदात शोपियां में बिहार के मजदूर अशोक चौहान के आतंकी हमले में मारे जाने के एक दिन बाद हुई है।

कश्मीर में बड़ी संख्या में हैं बाहरी मजदूर

बता दें कि कश्मीर के अलग-अलग जिलों में चलने वाली तमाम बड़ी परियोजनाओं में प्रवासी मजदूर काम करते हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब के मजदूर कश्मीर में सेब के बगीचों और इसकी पैकिंग में काम करते हैं। निर्माण कंपनियों के विभिन्न प्रोजेक्ट में ये काम करते हैं। यहां तक कि कश्मीर में स्थानीय स्तर पर फल-सब्जी बेचने वालों में भी इनकी बड़ी संख्या है। रेलवे की योजनाओं में भी इन मजदूरों से काम लिया जाता है। जानकारी के अनुसार, आतंकियों ने 2021 में भी इसी तरह प्रवासी मजदूरों पर आतंकी हमले किए थे। 16 और 17 अक्तूबर, 2021 को बिहार एवं यूपी के चार मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। तब घाटी से बड़े स्तर पर प्रवासी मजदूरों ने पलायन किया था। अब फिर कश्मीर में वैसा ही माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।