लोड हो रहा है...

हमें भी चाहिए सनातन धर्म बोर्ड का अधिकार : कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जयपुर. इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा ने जयपुर में मुसलमानों को एकजुट होकर दिल्ली का घेराव करने का आह्वान किया. वहीं तौकीर राजा के बयान पर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि हमें क्या करना, यह हमें सोचना है और हमें दिल्ली को बचाना है. सनातनियों अब एकजुट होने की जरूरत है.

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा दिल्ली को घिरने से बचाना है, हम सभी सनातनियों से कहते हैं कि आप सोचिए सरकारों से कहते हैं कि आप सोचिए कि जो दिल्ली की सड़कों पर जाम लगाने की बात कर रहे हैं वह आज नहीं करेंगे तो कल करेंगे. इसलिए हम लोगों को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए और ऐसे लोग जो देश के खिलाफ बातें कर रहे है उनको तुरंत जेल भेजा जाना चाहिए.

हमें भी सनातन बोर्ड का अधिकार चाहिए- देवकीनंदन ठाकुर

इसके साथ ही देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि हम 100 करोड़ सनातनियों का विषय है. कुछ दिन पहले बाला जी के प्रसाद में मिलावट की खबर चलाई थी. गैर सनातनी कैसे पवित्रता रखेंगे, दिल्ली में 16 तारीख को धर्म संसद बुलाई गई है और हमें भी सनातन बोर्ड का अधिकार चाहिए. आजादी के समय यह हो जाना चाहिए था, मंदिरों को अपने कब्जे में रखा गया. उससे प्राप्त धन का भी दुरपयोग किया गया, कृष्ण जन्म भूमि का निर्माण हो यह भी विषय रहेगा, बाला जी की पवित्रता का विषय रहेगा.

सनातन बोर्ड का गठन अगर यूपी से हो तो उचित होगा

वहीं देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि सनातन बोर्ड का गठन अगर यूपी से हो तो उचित होगा, हम सीएम योगी से निवेदन भी करते हैं. हम गृहमंत्री अमित शाह से भी मिलेंगे. हम सनातनी लोग बहुत सहें हैं अब और आगे नहीं सह पाएंगे, 100 करोड़ सनातनियों की आस्था का विषय है. हमें भी सनातन धर्म बोर्ड का गठन चाहिए, हम सरकार से सनातन धर्म बोर्ड के गठन की मांग करते हैं. इस बोर्ड का गठन तभी हो जाना चाहिए था, जब वक्फ बोर्ड बना था.

- Advertisement -

साभार : एबीपी न्यूज़

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।