लोड हो रहा है...

पंजाब पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को किया गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चंडीगढ़. हरियाणा-पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर मरणव्रत (भूख हड़ताल) शुरू करने से पहले संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पंजाब पुलिस उन्हें लुधियाना स्थित DMC अस्पताल ले गई है। कोई व्यक्ति उन तक न पहुंचे, इसके लिए अस्पताल के आसपास के एरिया को सील कर दिया गया है। अस्पताल में डल्लेवाल कुछ नहीं खा रहे हैं। उनको हिरासत में लिए जाने के बाद किसान नेता और पूर्व फौजी सुखजीत सिंह हरदो झंडे खनौरी बॉर्डर पर मरणव्रत पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे इस अनशन के दौरान मर जाते हैं तो उनका शव यहीं रहेगा और दूसरा किसान मरणव्रत पर बैठ जाएगा।

एक अन्य नेता ने बताया कि डल्लेवाल ठीक हैं। जैसा उन्होंने (डल्लेवाल) कहा था कि वह 26 से मरणव्रत पर बैठेंगे, उन्होंने लुधियाना में कुछ खाया नहीं है। इस बीच किसानों ने खनौरी बॉर्डर पर पहुंचकर प्रदर्शन भी किया। वहीं हरियाणा और पंजाब के सीनियर अधिकारियों की बैठक में सहमति बनी है कि शंभू बॉर्डर का 4 फीट का एरिया खोला जाएगा, ताकि किसान बिना ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के आगे बढ़ सकें। हालांकि औपचारिक ऐलान नहीं हुआ, लेकिन बैरिकेडिंग हटाना शुरू कर दी गई है। डल्लेवाल की हिरासत पर पहलवान बजरंग पूनिया ने कहा कि संविधान दिवस पर यह संविधान की हत्या है। मैं खनौरी बॉर्डर मोर्चे पर समर्थन में पहुंच रहा हूं। आप सब भी आइए और केंद्र और पंजाब सरकार के इस जुगलबंदी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाइए। जो किसान, नौजवान शंभू बॉर्डर के नजदीक हैं, वो शंभू बॉर्डर पहुंचे।

इससे पहले किसान नेता सरवन पंधेर ने कहा कि सोमवार रात करीब 2 बजे डल्लेवाल को खनौरी बॉर्डर से उठा लिया गया है। उन्हें कहां ले गए हैं, इसकी जानकारी नहीं है। जिन्होंने डल्लेवाल को उठाया है, उनमें कई पुलिसवाले हिंदी भाषा बोल रहे थे। डल्लेवाल को CM भगवंत मान के ज्यूरिस्डिक्शन से उठाया गया है, इसलिए पंजाब सरकार को किसानों के प्रति अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। बताना होगा कि उन्हें कहां ले गए हैं? अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

साभार : दैनिक भास्कर

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।