शनिवार, सितंबर 19 2026 | 11:33:52 AM

अबू आजमी ने दिए समाजवादी पार्टी के महाविकास अघाड़ी से अलग होने के संकेत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. विधानसभा चुनाव में हार के झटके के बाद से ही महाविकास अघाड़ी(MVA) में फूट की चर्चा चल रही थी। महाराष्ट्र में सत्ता स्थापित होने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। फिर विधानसभा के विशेष सत्र के पहले ही दिन एमवीए को बड़े झटके का सामना करना पड़ा। क्योंकि समाजवादी पार्टी ने महाविकास अघाड़ी छोड़ने का फैसला कर लिया है। जहां विपक्षी दल के नेताओं ने ईवीएम का विरोध करते हुए विधायक पद की शपथ नहीं लेने का रुख अपनाया। वहीं समाजवादी पार्टी के विधायक और महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी शामिल हुए। अबू आजमी ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए एमवीए को अलविदा कर दिया। महाराष्ट्र विधानसभा में समाजवादी पार्टी के दो विधायक हैं।

अबू आजमी ने क्या कहा?

अबू आजमी ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) की ओर से बाबरी मस्जिद को ढहाये जाने के लिए लोगों को बधाई देते हुए एक अखबार में विज्ञापन दिया गया था। उनके (उद्धव ठाकरे के) सहयोगी ने भी मस्जिद को ढहाए जाने की सराहना करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया है। आजमी ने कहा कि हम एमवीए छोड़ रहे हैं। मैं (समाजवादी पार्टी अध्यक्ष) अखिलेश सिंह यादव से बात कर रहा हूं।

क्यों उठाया ये कदम?

दरअसल शिवसेना (यूबीटी) के विधान पार्षद मिलिंद नार्वेकर ने बाबरी मस्जिद ढहाये जाने की घटना पर पोस्ट किया था, जिसके जवाब में सपा ने यह कदम उठाया। नार्वेकर ने मस्जिद ढहाये जाने की एक तस्वीर पोस्ट की, जिसके साथ ही शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे का कथन लिखा कि मुझे उन लोगों पर गर्व है जिन्होंने यह किया। शिवसेना (यूबीटी) सचिव ने पोस्ट में उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और खुद की तस्वीरें भी पोस्ट कीं। आजमी ने कहा कि अगर एमवीए में कोई भी ऐसी भाषा बोलता है, तो भाजपा और उनके बीच क्या अंतर है? हमें उनके साथ क्यों रहना चाहिए?

साभार : नवभारत टाइम्स

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।