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हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हो रहे 1008 कुंडिया महायज्ञ में गोली चलने से 2 युवक घायल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चंडीगढ़. हरियाणा के कुरुक्षेत्र में चल रहे 1008 कुंडिया महायज्ञ में गोली चलने से अफरा-तफरी मच गई. यज्ञ करने वाले ब्राह्मणों में आपस में हुई तकरार को लेकर गोली और लाठी चली. इस घटना में दो युवक घायल हो गए. गोली लगने से घायल होने वाले का नाम आशीष है जो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का रहने वाला.  उसकी जांघ में गोली लगी है. वहीं दूसरा युवक प्रिंस है, जिसके सिर पर पत्थर लगा है जो लखीमपुर खीरी का रहने वाला बताया गया है. यह सभी ब्राह्मण अलग-अलग राज्य से बुलाए गए थे, जो यज्ञ कर रहे थे. यज्ञ करवाने आए ब्राह्मणों पर लाठियां भांजी गईं और बाबा के बाउंसर ने गोलियां चलाईं. वहीं दूसरा युवक प्रिंस है, जिसके सिर पर पत्थर लगा है जो लखीमपुर खीरी का रहने वाला बताया गया है. यह सभी ब्राह्मण अलग-अलग राज्य से बुलाए गए थे, जो यज्ञ कर रहे थे. यज्ञ करवाने आए ब्राह्मणों पर लाठियां भांजी गईं और बाबा के बाउंसर ने गोलियां चलाईं.

विवाद की वजह क्या है?

कुरुक्षेत्र में फायरिंग की यह घटना केशव पार्क की है. दरअसल, शनिवार (22 मार्च) को सुबह साढ़े 9 बजे महायज्ञ में आए ब्राह्मणों को बासी खाना दिए जाने के मसले पर ​विवाद की शुरुआत हुई. विवाद बढ़ने पर यज्ञ आयोजक ने अपने सुरक्षाकर्मियों से पंडितों की जम कर कुटाई करवाई और गोली भी चलवा दी.

कुरुक्षेत्र-कैथल रोड पर लगाया जाम

फायरिंग की इस घटना में लखनऊ से आए आशीष तिवारी को गोली लग गई. आशीष तिवारी को गंभीर हालत में लोक नायक जय प्रकाश नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. इस घटना से नाराज ब्राह्मणों ने महायज्ञ स्थल के बाहर कुरुक्षेत्र-कैथल रोड जाम कर दिया. गुस्साएं ब्राह्मणों ने थीम पार्क के सामने सड़क पर जाम लगा दिया और जमकर पथराव किया. प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस ने सख्ती दिखाई और जाम खुलवाने का प्रयास किया. बता दें कि कुरुक्षेत्र के केशव पार्क में ब्राह्मण अलग-अलग राज्यों से महायज्ञ में शामिल होने के लिए बुलाए गए थे. बासी खाने को लेकर विवाद के बीच यज्ञ करवाने आए ब्राह्मणों पर लाठियां भांजी गई और बाबा के बाउंसर ने गोलियां चला दी. गोली चलने से हड़कंप मच गया.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।