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भारतीय तटरक्षक बल में जीएसएल निर्मित आठ में से पहला ‘अदम्य’ एफपीवी शामिल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में आठ एफपीवी परियोजना के तहत पहला फास्ट पैट्रोल वेसल (एफपीवी) ‘अदम्य’ 26 जून, 2025 को गोवा में भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) में शामिल कर लिया गया। एफपीवी आईसीजी के बेड़े में अपनी श्रेणी का पहला जहाज है जिसमें कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर (सीपीपी) और स्वदेशी रूप से विकसित गियरबॉक्स हैं, जो समुद्र में जहाज को बेहतर फुर्ती और परिचालन लचीलापन प्रदान करते हुए बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

यह जहाज अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिसमें 30 मिमी. सीआरएन-91 गन, अग्नि नियंत्रण प्रणाली के साथ दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोट-कंट्रोल गन, एक एकीकृत ब्रिज सिस्टम (आईबीएस), एक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म प्रबंधन प्रणाली (आईपीएमएस) और एक स्वचालित पावर प्रबंधन प्रणाली (एपीएमएस) शामिल हैं। एफपीवी की ये उन्नत प्रणालियां आईसीजी को भारत के व्यापक समुद्री क्षेत्र में अधिक सटीकता, दक्षता और जवाबदेही के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम बनाएंगी।

‘अदम्य’ जहाज का डिजाइन और निर्माण जीएसएल ने किया है जो भारत की बढ़ती जहाज निर्माण क्षमता का उदाहरण है। यह जहाज राष्ट्र के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण की दिशा में एक बड़ी छलांग है। ये एफपीवी आईसीजी के परिचालन बेड़े में बल गुणक के रूप में कार्य करेंगे, जिससे समुद्री कानून प्रवर्तन, तटीय निगरानी, ​​खोज और बचाव कार्यों और भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा के लिए त्वरित प्रतिक्रिया सक्षम होगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।