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कोर्ट ने थाईलैंड के प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को पद से हटाया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

बैंकाक. थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को पद से हटा दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन सेन के साथ लीक हुई बातचीत में उन्हें नैतिकता और ईमानदारी के उल्लंघन का दोषी पाया गया. 9 जजों वाली कोर्ट की बेंट ने कहा कि पैतोंगतार्न ने अपने निजी हितों को राष्ट्र के हितों से ऊपर रखा और देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया. इससे पहले, अदालत ने उन्हें निलंबित कर दिया था. इससे पहले, अदालत ने उन्हें निलंबित कर दिया था. 1 जुलाई को जब कोर्ट ने उनके खिलाफ मामले की सुनवाई को हरी झंडी दी थी तो उन्हें उसी समय उनकी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया था और उप प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने उनके तमाम कार्यों को संभाल रहे थे. कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि शिनावात्रा की उत्तराधिकारी अपनी नौकरी खो देंगी, जिसके लिए उन्हें एक साल पहले चुना गया था.

थाइलैंड की पीएम पर क्या हैं आरोप?

थाइलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा की एक फोन कॉल लीक हुई थी, जिसके बाद से उनके खिलाफ देश में गुस्सा फैल गया था. 15 जून को थाइलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के मकसद से यह कॉल की गई थी. हालांकि इस कॉल में पैटोंगटार्न का लहजा कुछ लोगों को ज्यादा दोस्ताना लगा और ऐसा भी कहा गया कि उन्होंने थाई सेना के एक जनरल की छवि खराब की.

किसने लीक की थी थाइलैंड पीएम की कॉल रिकॉर्डिंग?

बताया जा रहा है कि शिनावात्रा की यह कॉल रिकॉर्डिंग कंबोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन (Hun Sen) ने लीक की थी, जो 38 साल तक प्रधानमंत्री रहे और 2023 में अपने बेटे हुन मानेट (Hun Manet) को सत्ता सौंप दी. दिलचस्प बात यह है कि यह मामला ऐसे समय में आया जब मई में सीमा विवाद वाले इलाके में हुई झड़प में एक कंबोडियाई सैनिक मारा गया था. इसके बाद जून में दोनों देशों के बीच पाँच दिन तक लड़ाई हुई, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए और 2.6 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए.

शिनावात्रा के पिता की सियासत का बड़ा झटका

यह झटका शिनावात्रा पैटोंगटार्न के पिता और थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा के लिए भी बड़ा धक्का है. क्योंकि थाकसिन को 2006 में सेना ने सत्ता से हटा दिया था लेकिन वह अब भी परोक्ष रूप से थाई राजनीति में असर रखते हैं.

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साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।