लोड हो रहा है...

आईईपीएफए ने जीवन को आसान बनाने के लिए कम राशि वाले दावों के लिए दस्तावेज प्रक्रिया को सरल बनाने की पेशकश की

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) ने मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और कम राशि वाले दावों की दस्तावेज प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करने हेतु एक समिति का गठन किया था। इस पहल से समय सीमा में उल्लेखनीय कमी आने, पारदर्शिता में सुधार होने और निवेशकों को परेशानी मुक्त सेवाएँ मिलने की उम्मीद थी।

समिति में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए), निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई), भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीएमएआई), भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई), भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की), पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई), भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), और भारतीय रजिस्ट्रार संघ (आरएआईएन) के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट आईईपीएफए ​​को सौंप दी थी।

समिति के सुझावों के अनुसार आईईपीएफए ​​द्वारा अपनाए जाने के बाद ये सुझाव 5 लाख रुपये (भौतिक प्रतिभूतियां), 15 लाख रुपये (डीमैट प्रतिभूतियां) तथा 10,000 रुपये तक के लाभांश मूल्य के दावों पर लागू होंगे।

- Advertisement -

आईईपीएफए ​​के बारे में

निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) की स्थापना 7 सितंबर, 2016 को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन की गई थी। आईईपीएफए ​​निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि के प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार है, जिसका उद्देश्य शेयरों, दावा न किए गए लाभांशों और परिपक्व जमा/ऋणपत्रों की वापसी की सुविधा प्रदान कर निवेशकों के हितों की रक्षा करना है। अपनी पहलों के माध्यम से, आईईपीएफए ​​का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना, निवेशकों के अधिकारों की रक्षा करना और देश भर में वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना है।

अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं: www.iepf.gov.in

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।