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पीयूष गोयल ने निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संघों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 29 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संघों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में वाणिज्य विभाग, राजस्व विभाग, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), निर्यात संवर्धन परिषदों और विभिन्न उद्योग संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) और वाणिज्य विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही के दौरान किए गए प्रमुख सुधारों, निर्यात को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से आगामी सुधार उपायों और इस अवधि के दौरान निर्यात प्रदर्शन पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं।

चर्चा में उद्योग जगत से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों, निर्यात विविधीकरण में उपलब्धियों तथा देश से निर्यात को और अधिक बढ़ावा देने के लिए हितधारकों के विचारों और अपेक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

एफआईईओ, वस्त्र, परिधान, इंजीनियरिंग, रत्न एवं आभूषण, चिकित्सा उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, सेवाएं, ईपीसीएच, दूरसंचार, चमड़ा, सीआईआई, फिक्की, पीएचडीसीसीआई, एसआईएएम, एसोचैम और नैसकॉम जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने अनुकूल व्यापार वातावरण को बढ़ावा देने और भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार के अवसरों का विस्तार करने में केंद्रीय मंत्री और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की।

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श्री पीयूष गोयल ने व्यापार सुगमता और भारतीय निर्यातकों के लिए उन्नत वैश्विक बाजार पहुंच के सृजन हेतु चल रही पहलों के माध्यम से सुविधाजनक व्यापार को मजबूत करने के लिए सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।