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राजद प्रमुख लालू यादव का अपने पोते-पोतियों के साथ विदेशी पर्व हैलोवीन मनाते हुए वीडियो हुआ वायरल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. लालू प्रसाद यादव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. इस बार वजह उनका कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि पोते-पोतियों के साथ विदेशी त्योहार ‘हैलोवीन’ मनाना है. लालू यादव का पोती कात्यायनी और नाती-नातिन के साथ मस्ती करते हुए डरावने गेटअप का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) भड़क उठी है. बीजेपी ने लालू पर भारतीय संस्कृति के अपमान और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा है कि जो महाकुंभ जैसे आस्था के पर्व को ‘फालतू’ बताते हैं, वे विदेशी त्योहार मना रहे हैं.

भड़क गई बीजेपी

लालू यादव का हैलोवीन मनाते देख भाजपा भड़क गई, क्‍योंकि उन्‍होंने महाकुंभ पर टिप्‍पणी की थी. भाजपा के किसान मोर्चा के आधिकारिक अकाउंट से हुई पोस्‍ट में लिखा गया, ‘बिहार के लोगों, मत भूलो कि यही लालू यादव हैं, जिन्‍होंने आस्‍था और अध्‍यात्‍म के भव्‍य पर्व महाकुंभ को बेकार बताया था. अब वही, लालू यादव विदेशी त्‍योहार हैलोवीन मना रहे हैं.’

बिहार में चुनाव का दौर चल रहा है. पार्टियां एक-दूसरे पर वार करने का एक मौका भी नहीं चूक रही हैं. ऐसे में लालू यादव का हैलोवीन मनाने का मामला और तूल पकड़ सकता है.

लालू की बेटी रोहिणी ने पोस्‍ट किया वीडियो

लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें परिवार के लोग हैलोवीन मनाते नजर आ रहे हैं. ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. वीडियो में लालू यादव अपने परिवार के छोटे बच्चों से घिरे हुए है. एक बच्‍चे ने डरावना रूप धरा हुआ है. तेजस्वी यादव की बेटी कात्यायनी समेत सभी बच्चों ने हैलोवीन के लिए खास पोशाक पहनी हुई है. कुछ ने डरावने मुखौटे पहने हैं. लालू यादव इस वीडियो में हंसते और बच्‍चों के साथ मस्‍ती करते नजर आ रहे हैं.

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महाकुंभ पर लालू के बिगड़े थे बोल

इस बार प्रयागराज में हुए महाकुंभ में करोड़ों लोगों ने आस्‍था की डुबकी लगाई थी. कई राजनेताओं ने भी प्रयागराज जाकर स्‍नान किया था. इस दौरान जब लालू से महाकुंभ के बारे में पूछा गया था, तो उन्‍होंने कहा था, ‘अरे, ये सब कुंछ का क्‍या कोई मतलब है, फालतू है कुंभ.’ इस पर कई लोग भड़क गए थे.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।