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खरमास समाप्त 2026: शादी, मुंडन और गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त की पूरी लिस्ट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. खरमास की समाप्ति के साथ ही हिंदू धर्म में शुभ कार्यों पर लगा ‘ब्रेक’ हट जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही (मकर संक्रांति) मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। वर्ष 2026 में खरमास खत्म होने के बाद विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और जनेऊ जैसे कार्यों के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।

1. विवाह शुभ मुहूर्त 2026 (जनवरी से अप्रैल)

खरमास 14 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद जनवरी के अंतिम सप्ताह से शहनाइयां गूंजना शुरू हो जाएंगी।

महीनाविवाह की शुभ तिथियां
जनवरी 202616, 17, 18, 21, 22, 23, 24, 26
फरवरी 20261, 2, 5, 6, 12, 13, 14, 18, 19, 21, 22, 25
मार्च 20261, 2, 5, 6, 7 (इसके बाद 14 मार्च से पुनः खरमास शुरू होगा)
अप्रैल 202616, 18, 19, 20, 21, 25, 26 (खरमास समाप्ति के बाद)

2. गृह प्रवेश मुहूर्त 2026

नया घर लेने या नए घर में शिफ्ट होने के लिए खरमास के बाद ये दिन सबसे उत्तम हैं:

  • जनवरी: 22, 23, 26

  • फरवरी: 2, 5, 7, 12, 13, 14, 19, 23

  • मार्च: 2, 5, 6, 7

3. मुंडन और जनेऊ संस्कार

बच्चों के मुंडन या जनेऊ (उपनयन संस्कार) के लिए भी मकर संक्रांति के बाद के मुहूर्त श्रेष्ठ माने जाते हैं:

  • मुख्य तिथियां: फरवरी में बसंत पंचमी (22 फरवरी 2026) का दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ होता है, इस दिन किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य बिना पंचांग देखे किया जा सकता है। इसके अलावा मार्च के शुरुआती हफ्ते भी उपयुक्त हैं।

मांगलिक कार्यों के लिए कुछ विशेष बातें

  1. अबूझ मुहूर्त: साल 2026 में बसंत पंचमी (22 फरवरी) और अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) ऐसे दिन हैं, जब किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती।

  2. गुरु और शुक्र तारा: विवाह के लिए गुरु और शुक्र ग्रह का उदय होना अनिवार्य है। यदि ये ग्रह अस्त हों, तो विवाह वर्जित माने जाते हैं। 2026 में इन ग्रहों की स्थिति अनुकूल बनी हुई है।

  3. होलाष्टक का ध्यान: 25 फरवरी से 3 मार्च 2026 (होली से 8 दिन पहले) तक ‘होलाष्टक’ रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए इस दौरान शादी या गृह प्रवेश की योजना न बनाएं।

नोट: ये तिथियां सामान्य पंचांग गणना पर आधारित हैं। स्थानीय परंपराओं और जातक की कुंडली के अनुसार नक्षत्रों में भिन्नता हो सकती है, इसलिए किसी भी बड़े कार्य से पहले अपने पंडित जी या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।