नई दिल्ली. आज के दौर में युवाओं के बीच पैर में काला धागा बांधना एक बड़ा ‘फैशन स्टेटमेंट’ बन चुका है। सेलिब्रिटी हों या आम छात्र, हर दूसरा व्यक्ति टखने पर काला धागा बांधे नजर आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसे आप केवल स्टाइल समझ रहे हैं, उसका संबंध सीधे तौर पर ज्योतिष शास्त्र और आपके भाग्य से है?
शास्त्रों के अनुसार, काला धागा केवल नजर से ही नहीं बचाता, बल्कि इसका सीधा संबंध न्याय के देवता शनिदेव और छाया ग्रह राहु-केतु से है। गलत तरीके से पहना गया धागा आपको लाभ की जगह भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
काला धागा बांधने का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में काला रंग शनि ग्रह का प्रतीक माना गया है। काले धागे को धारण करने के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण होते हैं:
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नजर दोष से सुरक्षा: काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है। माना जाता है कि काला धागा बुरी नजर के प्रभाव को शरीर में प्रवेश नहीं करने देता।
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शनि की कृपा: ज्योतिषियों के अनुसार, अभिमंत्रित काला धागा पहनने से शनि की साढ़ेसाती और ढैया का प्रभाव कम होता है।
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स्वास्थ्य लाभ: आयुर्वेद और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, पैर के अंगूठे या टखने में धागा बांधने से नाभि (Navel) खिसकने की समस्या और पेट दर्द में राहत मिलती है।
कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियाँ?
काला धागा पहनने के कुछ कड़े नियम हैं। यदि इनका पालन न किया जाए, तो शनिदेव की वक्र दृष्टि का सामना करना पड़ सकता है:
1. गलत राशि का चुनाव
शास्त्रों के अनुसार, मेष (Aries) और वृश्चिक (Scorpio) राशि के जातकों को काला धागा नहीं पहनना चाहिए। इन राशियों का स्वामी ‘मंगल’ है और मंगल का काले रंग (शनि) के साथ शत्रुता का भाव है। इन राशि वालों के लिए काला धागा जीवन में अशांति और कार्यों में बाधा ला सकता है।
2. मंत्रोच्चार के बिना धारण करना
अक्सर लोग बाजार से धागा लाकर सीधे बांध लेते हैं। धार्मिक दृष्टि से, इसे शनिवार के दिन ‘ॐ शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए अभिमंत्रित करके ही पहनना चाहिए।
3. अन्य धागों के साथ मेल
यदि आपने पैर में काला धागा बांधा है, तो उसी हाथ या पैर में लाल या पीला (कलावा) धागा भूलकर भी न बांधें। रंगों का यह विरोध आपके ग्रहों की स्थिति बिगाड़ सकता है।
काला धागा बांधते समय इन बातों का रखें खास ध्यान
यदि आप सुरक्षा या सौभाग्य के लिए काला धागा पहनना चाहते हैं, तो इन नियमों को नोट कर लें:
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शुभ मुहूर्त: काला धागा हमेशा शनिवार के दिन ही धारण करें। भैरव मंदिर या शनि मंदिर में ले जाकर इसे स्पर्श कराना अति शुभ होता है।
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गांठों का महत्व: धागा बांधते समय इसमें 9 गांठें लगानी चाहिए। ये नौ गांठें नौ ग्रहों का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रतीक हैं।
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ब्रह्मचर्य और आचरण: इसे धारण करने के बाद व्यक्ति को सात्विक रहने का प्रयास करना चाहिए और अनैतिक कार्यों से बचना चाहिए, ताकि शनिदेव की कृपा बनी रहे।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विज्ञान कहता है कि हमारा शरीर पंच तत्वों से बना है। काला रंग ऊष्मा (Heat) का अवशोषक होता है। यह पर्यावरण में मौजूद नकारात्मक तरंगों को सोखकर उन्हें नष्ट कर देता है, जिससे व्यक्ति का सुरक्षा चक्र मजबूत होता है।
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