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बजट 2026 की आहट: क्या ‘संयुक्त टैक्स रिटर्न’ होगा मध्यम वर्ग के लिए मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली: 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना नौवां बजट पेश करने जा रही हैं। इस बार के बजट में सबसे अधिक चर्चा इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) द्वारा दिए गए ‘संयुक्त कराधान’ (Joint Taxation) के प्रस्ताव की है। यदि सरकार इसे स्वीकार करती है, तो यह भारतीय कर प्रणाली में आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है।

1. क्या है संयुक्त टैक्स रिटर्न (Joint Taxation)?

वर्तमान में भारत में पति और पत्नी को अपनी आय पर अलग-अलग टैक्स देना होता है। संयुक्त टैक्स रिटर्न का अर्थ है:

  • विवाहित जोड़े को अपनी कुल आय को एक साथ जोड़कर एक ही इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का विकल्प मिलेगा।

  • इसे “Joint Filing” कहा जाता है, जो अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में पहले से लागू है।

  • विकल्प (Optional): यह अनिवार्य नहीं होगा; जोड़े चुन सकेंगे कि अलग-अलग रिटर्न भरने में फायदा है या साथ में।

2. मध्यम वर्ग को कैसे होगा बड़ा फायदा?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना मध्यम वर्ग के लिए “मास्टरस्ट्रोक” साबित हो सकती है:

  • एग्जेंप्शन लिमिट का दोगुना होना: प्रस्तावित मॉडल के तहत, संयुक्त रिटर्न भरने वालों के लिए कर-मुक्त आय की सीमा ₹6 लाख या ₹8 लाख तक बढ़ाई जा सकती है (जो अभी व्यक्तिगत रूप से ₹3 लाख से ₹4 लाख है)।

  • स्लैब में बदलाव: संयुक्त आय के लिए नए टैक्स स्लैब तैयार किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, ₹14 लाख तक की संयुक्त आय पर मात्र 5% टैक्स का प्रस्ताव है।

  • सिंगल-अर्नर फैमिली को राहत: जिस परिवार में केवल पति या पत्नी में से कोई एक ही कमाता है, उन्हें दूसरे पार्टनर की एग्जेंप्शन लिमिट का भी फायदा मिलेगा, जिससे टैक्स लायबिलिटी काफी कम हो जाएगी।

3. प्रमुख मांगें और प्रस्ताव (ICAI का मॉडल)

ICAI ने वित्त मंत्रालय को जो सुझाव दिए हैं, उनमें प्रमुख हैं:

  • Standard Deduction: दोनों वेतनभोगी (Salaried) होने पर संयुक्त रिटर्न में भी अलग-अलग मानक कटौती का लाभ मिले।

  • Home Loan & 80D: होम लोन के ब्याज और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर मिलने वाली छूट को संयुक्त रूप से अधिक प्रभावी ढंग से क्लेम किया जा सकेगा।

4. चुनौतियां और सरकारी रुख

हालांकि यह प्रस्ताव लुभावना है, लेकिन सरकार के सामने राजस्व की हानि (Revenue Loss) एक बड़ी चिंता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 15-20 लाख तक की संयुक्त आय पर रियायत दी जाती है, तो सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा। हालांकि, इससे घरेलू खपत (Domestic Consumption) और निवेश में बढ़ोतरी होगी, जो अंततः अर्थव्यवस्था को गति देगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।