मुंबई. टाटा समूह ने अपने संघर्षरत एविएशन बिजनेस, विशेषकर एयर इंडिया को फिर से पटरी पर लाने के लिए एक बेहद अनुभवी चेहरे पर भरोसा जताया है। टाटा संस ने पूर्व नागरिक उड्डयन सचिव (Civil Aviation Secretary) प्रदीप सिंह खरोला को अपना सलाहकार (Advisor) नियुक्त किया है।
अनुभव का इस्तेमाल: रेगुलेटरी जांच और सरकार से तालमेल
1985 बैच के IAS अधिकारी खरोला की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब एयर इंडिया चौतरफा चुनौतियों से घिरी है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने व्यक्तिगत रूप से खरोला को इस भूमिका के लिए चुना है। उनकी मुख्य जिम्मेदारियां निम्नलिखित होंगी:
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सरकार के साथ समन्वय: संवेदनशील मुद्दों पर केंद्र सरकार और रेगुलेटरी बॉडीज के साथ बातचीत का नेतृत्व करना।
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चीनी एयरस्पेस का मुद्दा: पाकिस्तानी एयरस्पेस पर प्रतिबंध के कारण हो रहे वित्तीय नुकसान को कम करने के लिए चीन से होकर उड़ान भरने की अनुमति प्राप्त करना।
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सेफ्टी रिव्यू: पिछले साल हुए बोइंग 787 हादसे (260 मौतें) के बाद एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना।
सख्त रडार पर एयर इंडिया: नोटिसों की बौछार
खरोला की नियुक्ति की सबसे बड़ी वजह एयरलाइन के ऑपरेशन्स में दिख रही खामियां हैं। आंकड़ों के अनुसार:
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DGCA की कार्रवाई: पिछले दो वर्षों में एयर इंडिया को 84 और उसकी सहयोगी एयर इंडिया एक्सप्रेस को 65 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
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हालिया जुर्माना: पिछले हफ्ते ही बिना ‘एयरवर्थनेस परमिट’ के 8 बार विमान उड़ाने के कारण DGCA ने एयरलाइन पर भारी जुर्माना लगाया है।
पुरानी पहचान, नई चुनौती: खरोला ने ही 2019 से 2021 के बीच एयर इंडिया के निजीकरण की प्रक्रिया को लीड किया था, जिसके बाद टाटा ग्रुप ने इसका टेकओवर किया था। वे एयर इंडिया के चेयरमैन भी रह चुके हैं, जिससे उन्हें सिस्टम की गहरी समझ है।
क्या खरोला बदल पाएंगे एयर इंडिया की किस्मत?
टाटा समूह के लिए एयर इंडिया का अधिग्रहण अब तक का सबसे कठिन सफर साबित हुआ है। तकनीकी खामियों, सुरक्षा चिंताओं और रेगुलेटरी सख्ती के बीच खरोला का प्रशासनिक अनुभव ‘महाराजा’ की साख बचाने में कितना कारगर होता है, यह आने वाले कुछ महीने तय करेंगे।
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