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पश्चिम एशिया तनाव से भारत में ऊर्जा संकट: एलपीजी सप्लाई चेन चरमराई, जानें नए नियम

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भारत में एलपीजी सिलेंडर की लाइन और ऊर्जा संकट

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। मार्च 2026 की शुरुआत से ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) चरमरा गई है, जिसका सीधा असर भारत के रसोई घरों और औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ रहा है। देश के प्रमुख महानगरों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act (अनिवार्य वस्तु अधिनियम) के तहत सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सैन्य गतिरोध: सप्लाई चेन पर ब्रेक

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट की मुख्य जड़ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में बढ़ता तनाव है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है।

  • भारत की निर्भरता: भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 50% से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है।

  • मौजूदा स्थिति: सुरक्षा कारणों से टैंकरों की आवाजाही धीमी हो गई है, जिससे घरेलू बंदरगाहों पर गैस की आवक में भारी कमी आई है।

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता: कमर्शियल गैस पर संकट

आम आदमी को राहत देने के लिए सरकार ने एलपीजी वितरण के लिए नई प्राथमिकता सूची जारी की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के आदेशानुसार, अब घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में हड़कंप

सरकार के इस फैसले का सबसे कड़ा प्रहार कमर्शियल सेक्टर पर पड़ा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में व्यवसायिक सिलेंडरों की सप्लाई लगभग 40% तक कम हो गई है। होटल एसोसिएशनों का कहना है कि यदि स्थिति 15 दिनों के भीतर नहीं सुधरी, तो कई छोटे और मध्यम रेस्टोरेंट्स को अपने शटर गिराने पड़ सकते हैं।

जमाखोरी रोकने के लिए ’25 दिन’ का नया नियम

बाजार में गैस की कृत्रिम कमी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं:

  1. बुकिंग अंतराल: अब दो सिलेंडर बुक करने के बीच की न्यूनतम अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।

  2. स्टॉक ऑडिट: एलपीजी वितरण कंपनियों (Distributors) को अपने स्टॉक की रीयल-टाइम रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

  3. कड़ी निगरानी: जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे गोदामों पर छापेमारी करें ताकि कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर अवैध भंडारण न कर सके।

कच्चे तेल में उबाल: $119 प्रति बैरल के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। इसका सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है।

7 मार्च 2026 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी की गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि तनाव जारी रहा, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

सरकार का ‘प्लान बी’: वैकल्पिक स्रोतों की तलाश

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए अब खाड़ी देशों से इतर नए विकल्पों पर काम कर रहा है। सरकार निम्नलिखित देशों के साथ रणनीतिक बातचीत कर रही है:

  • अल्जीरिया और नॉर्वे: पाइपलाइन और एलएनजी (LNG) आपूर्ति के लिए।

  • ऑस्ट्रेलिया और कनाडा: दीर्घकालिक गैस समझौतों के लिए।

  • स्वदेशी उत्पादन: रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादों के बजाय प्रोपेन और ब्यूटेन के उत्पादन पर ध्यान दें ताकि घरेलू एलपीजी आपूर्ति बढ़ाई जा सके।

आगे की राह: आत्मनिर्भरता ही एकमात्र विकल्प

इस संकट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत को भू-राजनीतिक झटकों से बचने के लिए ‘आत्मनिर्भर’ होना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।

देश में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहे असर के बारे में अधिक पढ़ने के लिए Matribhumi Samachar पर जाएं।

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