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वाराणसी की तपती धूप में बाबा के भक्तों को मिली बड़ी राहत, मंदिर प्रशासन ने बिछाया ‘कवच’

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काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं के लिए लगाए गए सफेद जर्मन हैंगर शेड।

वाराणसी. उत्तर भारत में सूर्य देव के तेवर तीखे होते ही बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भी तापमान बढ़ने लगा है। ऐसे में काशी विश्वनाथ धाम (Kashi Vishwanath Dham) आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रशासन ने राहत की एक बड़ी योजना जमीन पर उतारी है। मंदिर परिसर में अब श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में तपती धूप का सामना नहीं करना पड़ेगा।

जर्मन हैंगर: धूप और लू का कवच

श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए मंदिर प्रशासन ने पूरे दर्शन मार्ग पर जर्मन हैंगर (अस्थायी शेड) लगाने का कार्य पूरा कर लिया है। ये हैंगर न केवल सीधे सूर्य की रोशनी को रोकते हैं, बल्कि इनके नीचे का तापमान बाहर की तुलना में 3 से 5 डिग्री तक कम रहता है।

खास बात: यह व्यवस्था गंगा द्वार से लेकर मंदिर के मुख्य चौक तक की गई है, ताकि कतार में खड़े भक्तों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को लू (Heat Wave) से बचाया जा सके।

वाराणसी में बढ़ते तापमान और मौसम का हाल

केवल शेड ही नहीं, मिलेंगी ये ‘हाई-टेक’ सुविधाएं

प्रशासन ने इस बार केवल छाया ही नहीं, बल्कि गर्मी को मात देने के लिए कई अन्य नवीनतम इंतजाम भी किए हैं:

  • मिस्ट कूलिंग सिस्टम: कतारों के साथ-साथ ‘मिस्ट फोगर्स’ लगाए जा रहे हैं जो पानी की महीन फुहारों से हवा को ठंडा रखेंगे।

  • जूट के कालीन (Cooling Mats): मंदिर के फर्श को ठंडा रखने के लिए विशेष जूट के मेट बिछाए जा रहे हैं, जिन पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा ताकि नंगे पैर चलने वाले भक्तों को जलन न हो।

  • नि:शुल्क पेयजल और ओआरएस: परिसर के हर मोड़ पर ठंडे पानी की व्यवस्था के साथ-साथ आपातकालीन स्थिति के लिए मेडिकल डेस्क पर ओआरएस (ORS) के पैकेट उपलब्ध कराए गए हैं।

आप अपने लेख में इन संभावित लिंक्स को जोड़ सकते हैं (यदि उपलब्ध हों):

काशी विश्वनाथ मंदिर ‘सुगम दर्शन’ ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया

बढ़ती भीड़ को देखते हुए ‘क्राउड मैनेजमेंट’

गर्मी की छुट्टियों और विशेष पर्वों के दौरान काशी में पर्यटकों की संख्या 20-30% तक बढ़ जाती है। मंदिर प्रशासन के अनुसार:

  1. होल्डिंग एरिया: श्रद्धालुओं को सीधे धूप में खड़ा करने के बजाय शेड वाले ‘होल्डिंग एरिया’ में बैठाया जा रहा है।

  2. बैच सिस्टम: भीड़ को छोटे-छोटे बैच में छोड़ा जा रहा है ताकि गर्भगृह के पास भीड़ न जमा हो और हवा का संचार बना रहे।

श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी

यदि आप भी इन दिनों बाबा के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो इन सुझावों का पालन करें:

  • समय का ध्यान: सुबह 5:00 बजे से 9:00 बजे तक या शाम 6:00 बजे के बाद दर्शन करना अधिक सुखद रहता है।

  • सुगम दर्शन: भीड़ से बचने के लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से ‘सुगम दर्शन’ की बुकिंग पहले से कर सकते हैं।

निष्कर्ष: काशी विश्वनाथ धाम का यह नया स्वरूप न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक तकनीक और संवेदनशीलता का अद्भुत संगम भी है। जर्मन हैंगर की यह पहल वाराणसी आने वाले पर्यटकों के अनुभव को और भी यादगार बनाएगी।

वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों पर पर्यटन के खास नियम

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