लखनऊ । शुक्रवार, 24 जुलाई 2026
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में एक बड़ा प्रशासनिक एवं कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के कड़े निर्देशों एवं मार्गदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मामले की जांच को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी व निष्पक्ष बनाने के लिए एक नई विशेष जांच टीम (SIT) के गठन का फैसला लिया है।
इस नई SIT में राज्य के वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिससे जांच का दायरा पहले की तुलना में अधिक विस्तृत और तकनीकी रूप से सुदृढ़ कर दिया गया है।
🏛️ सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश: ‘राजनीति न हो, जांच हो निष्पक्ष’
मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था और जन-भावनाओं से जुड़े इस विषय पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। अदालत ने रेखांकित किया कि कानून के प्रावधानों के तहत अपराध की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचनी चाहिए।
इसके साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार से पूर्व में हुई जांच की प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) तलब की थी और निर्देश दिया था कि मामले से संबंधित सभी उपलब्ध साक्ष्यों, दान रसीदों और डिजिटल अभिलेखों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
🔍 नई SIT की कार्यप्रणाली और जांच का दायरा
सरकारी सूत्रों एवं प्राप्त जानकारी के अनुसार, नई SIT केवल सतही पूछताछ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों का भी गहराई से विश्लेषण करेगी। जांच टीम को निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर पड़ताल की जिम्मेदारी दी गई है:
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डिजिटल व बैंक लेनदेन: मंदिर ट्रस्ट को ऑनलाइन माध्यमों और बैंक खातों के जरिए मिले दान का फॉरेंसिक मिलान।
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दान पेटियों की गिनती प्रक्रिया: मंदिर परिसर में रखी दान पेटियों (Donation Boxes) को खोलने, गिनती करने और राशि को बैंक में जमा कराने की पूरी कार्यप्रणाली का ऑडिट।
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सीसीटीवी (CCTV) फुटेज का विश्लेषण: गिनती कक्षों और सुरक्षा क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत समीक्षा।
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भौतिक व कीमती वस्तुएं: सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषणों के दान के रिकॉर्ड का सत्यापन।
विशेष नोट: नई SIT को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट राज्य सरकार एवं शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
🛡️ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अन्य पक्षों का रुख
मामले पर विवाद बढ़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद करार दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर में आने वाले हर एक रुपये के दान का निर्धारित लेखा-परीक्षण (Audit) और व्यवस्थित हिसाब रखा जाता है।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं और विपक्ष ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी आय-व्यय और साक्ष्यों को सार्वजनिक व अदालत की निगरानी में जांचने की मांग की है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. नई SIT का गठन क्यों किया गया है?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत राम मंदिर में दान के कथित गबन/वित्तीय अनियमितताओं की जांच को अधिक पारदर्शी, तकनीकी और निष्पक्ष बनाने के लिए वरिष्ठ IPS अधिकारियों की अगुवाई में नई SIT गठित की गई है।
2. जांच टीम किन-किन दस्तावेजों की पड़ताल करेगी?
टीम बैंक रिकॉर्ड्स, डिजिटल पेमेंट गेटवे, सीसीटीवी फुटेज, दान पेटियों की गिनती के रजिस्टर और ऑडिट रिपोर्ट की विस्तृत जांच करेगी।
3. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का इस मामले पर क्या कहना है?
ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि दान में प्राप्त पूरी राशि का नियमानुसार लेखा-जोखा रखा जाता है और नियमित ऑडिट कराया जाता है।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख उपलब्ध कानूनी याचिकाओं, सरकारी बयानों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। मामले में अंतिम तथ्य और निष्कर्ष न्यायालय के समक्ष पेश होने वाली जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेंगे।
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