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असम चुनाव 2026: भाजपा का ‘विजय मंत्र’, 9 अप्रैल को वोटिंग और विकास बनाम तुष्टीकरण का रण

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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गुवाहाटी. असम विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मी के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी मीडिया रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। शनिवार को गुवाहाटी में आयोजित एक विशेष मीडिया कार्यशाला में भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने राज्य के प्रवक्ताओं और टीवी पैनलिस्टों को चुनावी मैदान में विपक्ष को पछाड़ने का ‘विजय मंत्र’ दिया।

9 अप्रैल को मतदान: ‘विकास बनाम तुष्टीकरण’ बनेगा मुख्य मुद्दा

कार्यशाला को संबोधित करते हुए बलूनी ने स्पष्ट किया कि आगामी 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान में भाजपा का मुकाबला केवल विकास के दावों पर नहीं, बल्कि विचारधारा की लड़ाई पर भी होगा। उन्होंने प्रवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे जनता के बीच ‘डबल इंजन’ सरकार (केंद्र में मोदी और राज्य में हिमंत बिस्वा सरमा) की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से रखें।

बलूनी ने कहा, “असम की जनता अब भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति को नकार चुकी है। हमारा लक्ष्य रिकॉर्ड तोड़ हैटट्रिक बनाना है।”

कार्यशाला की 5 बड़ी बातें (Key Highlights):

  1. कांग्रेस पर सीधा प्रहार: अनिल बलूनी ने प्रवक्ताओं को कांग्रेस की ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ को मजबूती से उजागर करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के भ्रामक नैरेटिव का जवाब तथ्यों के साथ तुरंत दिया जाए।

  2. विकास का प्रवेश द्वार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम को पूर्वोत्तर भारत के ‘विकास प्रवेश द्वार’ (Gateway of Development) के रूप में प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया।

  3. सोशल मीडिया और टीवी डिबेट रणनीति: कार्यशाला में रियल-टाइम रिस्पॉन्स (Real-time response) पर चर्चा हुई, ताकि विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे किसी भी नैरेटिव को सोशल मीडिया पर हावी होने से पहले ही काउंटर किया जा सके।

  4. मतदान और परिणाम की तारीखें: बलूनी ने याद दिलाया कि 9 अप्रैल को होने वाली वोटिंग असम के भविष्य के लिए निर्णायक होगी, जिसका परिणाम 4 मई 2026 को आएगा।

  5. नया असम, विकसित भारत: उन्होंने जोर दिया कि विकसित भारत @2047 के संकल्प को पूरा करने में असम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है।

चुनावी समीकरण: परिसीमन के बाद पहला चुनाव

यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि 2023 में हुए परिसीमन (Delimitation) के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है। भाजपा ने पहले ही अपने 88 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपनी पारंपरिक सीट जालुकबारी से फिर से मैदान में हैं।

तेज होगी जुबानी जंग

इस मीडिया वर्कशॉप के बाद यह साफ है कि आने वाले दिनों में असम की राजनीति में ‘विकास बनाम तुष्टीकरण’ की बहस और तेज होगी। भाजपा ने अपने संचार तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है ताकि राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।