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जौनपुर: बबुरा गांव में कथित मतांतरण पर भारी हंगामा, 8 के खिलाफ FIR; यूपी के नए सख्त कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी

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लखनऊ | 5 अप्रैल, 2026

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के बदलापुर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत बबुरा गांव में रविवार को कथित रूप से बड़े पैमाने पर मतांतरण कराए जाने की सूचना ने इलाके में सांप्रदायिक और सामाजिक हलचल तेज कर दी है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की सक्रियता और पुलिस की छापेमारी के बाद अब इस मामले में ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’ की धाराओं के तहत कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।

बजरंग दल का छापा और पुलिस की कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, बजरंग दल के जिला संयोजक सत्या शुक्ल को गुप्त सूचना मिली थी कि बबुरा गांव में ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रलोभन देकर ग्रामीणों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही कार्यकर्ताओं का एक समूह मौके पर पहुंचा, जहां संदिग्ध गतिविधियां देख डायल 112 को सूचित किया गया।

पुलिस के पहुंचते ही मौके पर मौजूद मुख्य संचालक फरार होने में सफल रहे, लेकिन पुलिस ने कई महिलाओं और पुरुषों को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की।

इन 8 लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा

सत्या शुक्ल की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही कई प्रभावशाली स्थानीय लोगों और बाहरी संपर्क सूत्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। नामजद आरोपियों की सूची इस प्रकार है:

  • राजेश गौतम उर्फ सोनू व उनकी पत्नी निशा (बबुरा)

  • हरिकेश गौतम व उनकी पत्नी मंजू (बबुरा)

  • शीला गौतमप्रमोद मौर्य (बबुरा)

  • विकास मौर्य (विठुआकला)

  • विनोद यादव उर्फ मिंटू (ढेमा)

संशोधित कानूनी प्रावधान: अब और भी मुश्किल होगी राह

इस मामले में पुलिस उत्तर प्रदेश के संशोधित धर्मांतरण विरोधी कानून (2024) के प्रावधानों को लागू कर सकती है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल ही में कानून को और सख्त किया है:

  • सजा में वृद्धि: नए संशोधनों के बाद, जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण के मामलों में अब अधिकतम आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

  • बढ़ता दायरा: पहले केवल पीड़ित या परिजन ही शिकायत कर सकते थे, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति इसकी सूचना पुलिस को दे सकता है।

  • कठोर जमानत: नए नियमों के तहत इन मामलों में जमानत मिलना भी काफी कठिन हो गया है।

सामाजिक सौहार्द पर संकट और ग्रामीणों का पक्ष

घटना के बाद बबुरा गांव में भारी पुलिस बल तैनात है। जहां एक ओर हिंदूवादी संगठन इसे “डेमोग्राफिक बदलाव” की साजिश बता रहे हैं, वहीं गांव के कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है कि पुलिस को सूक्ष्मता से जांच करनी चाहिए ताकि किसी की धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) का हनन न हो। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर चिंता है कि ऐसी घटनाओं से वर्षों पुराना आपसी भाईचारा प्रभावित हो सकता है।

प्रशासन का रुख

बदलापुर पुलिस के अनुसार, आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। मौके से बरामद धार्मिक साहित्य और अन्य सामग्रियों को साक्ष्य के तौर पर कब्जे में लिया गया है। एएसपी (जौनपुर) ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।

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