गुरुवार, जून 04 2026 | 03:46:39 AM
Breaking News
Home / राज्य / उत्तरप्रदेश / संत कबीर नगर: अल-हुदा मदरसे पर प्रशासन का कड़ा प्रहार; अवैध निर्माण और विदेशी फंडिंग के आरोपों के बीच बुलडोजर कार्रवाई

संत कबीर नगर: अल-हुदा मदरसे पर प्रशासन का कड़ा प्रहार; अवैध निर्माण और विदेशी फंडिंग के आरोपों के बीच बुलडोजर कार्रवाई

Follow us on:

लखनऊ । रविवार, 26 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जनपद में रविवार की सुबह प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मोती नगर स्थित अल-हुदा मदरसे के अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया। सदर कोतवाली क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रबंधन की याचिका खारिज होने और अवैध निर्माण की पुष्टि के बाद की गई है।

प्रशासन की कार्रवाई और कानूनी आधार

सदर एसडीएम हृदय राम त्रिपाठी के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई का मुख्य कारण मदरसे का बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण होना बताया गया है। प्रशासनिक विवरण के अनुसार:

  • नोटिस प्रक्रिया: संबंधित विभाग ने 13 जनवरी 2026 को मदरसा प्रबंधन को नोटिस जारी कर निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे थे।

  • दस्तावेजों का अभाव: निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रबंधन कोई भी वैध साक्ष्य या स्वीकृत नक्शा प्रस्तुत नहीं कर सका।

  • न्यायिक हस्तक्षेप: मदरसे के संचालक मौलाना शमसुल हुदा खान ने ध्वस्तीकरण को रोकने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन अदालत ने तथ्यों के आधार पर राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

यहाँ Matribhumi Samachar से संबंधित कुछ प्रासंगिक लिंक दिए गए हैं:

राष्ट्रीय समाचार

विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच

इस ध्वस्तीकरण के पीछे केवल अवैध निर्माण ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर पहलू भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों (ATS और ED) की रिपोर्ट के अनुसार:

  1. ब्रिटिश नागरिकता: मौलाना शमसुल हुदा खान ने कथित तौर पर 2007/2013 के आसपास ब्रिटेन की नागरिकता ले ली थी, फिर भी वह भारत में सरकारी शिक्षक के रूप में वेतन और पेंशन लाभ लेता रहा।

  2. पाकिस्तानी कनेक्शन: मौलाना के तार पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठन ‘दावत-ए-इस्लामी’ से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं। जांच में सामने आया है कि उसने दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों में ऐसे कार्यक्रमों में भाग लिया जहाँ भारत विरोधी नारे लगाए गए थे।

  3. करोड़ों की फंडिंग: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में ₹30 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध विदेशी फंडिंग के सबूत मिले हैं, जिसका उपयोग उत्तर प्रदेश में संपत्तियां खरीदने और मदरसों के नेटवर्क को बढ़ाने में किया गया।

भविष्य की कार्रवाई

प्रशासन के अनुसार, यह केवल अवैध ढांचे को गिराने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उस पूरे वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश है जो अवैध विदेशी धन के सहारे संचालित हो रहा था। वर्तमान में इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

उत्तर प्रदेश बिजली बिल और 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज नियम पर नियामक आयोग (UPERC) के फैसले का ग्राफिक्स विवरण।

बड़ी राहत: यूपी के 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को झटका देने वाला 10% फ्यूल सरचार्ज गैरकानूनी घोषित

लखनऊ । मंगलवार, 2 जून, 2026 उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद …