मुंबई. हर साल फरवरी के करीब आते ही टीवी और अखबारों में ‘राजकोषीय घाटा’, ‘कैपेक्स’ और ‘विनिवेश’ जैसे शब्दों की बाढ़ आ जाती है। एक आम आदमी के लिए ये शब्द किसी अबूझ पहेली जैसे लगते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इन शब्दों के पीछे ही आपकी सैलरी, महंगाई …
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