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वस्त्र की विविध परंपराओं को एक साथ लाने के लिए ‘सूत्र संतति’ प्रदर्शनी का हुआ आयोजन

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नई दिल्ली (मा.स.स.). संस्कृति मंत्रालय और राष्ट्रीय संग्रहालय ने अभेराज बालडोटा फाउंडेशन के सहयोग से देश में वस्त्र की विविध परंपराओं को एक साथ लाकर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत के जन्म के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कल एक प्रदर्शनी ‘सूत्र संतति’ का आयोजन किया। प्रदर्शनी 20 सितंबर, 2022 तक नई दिल्ली में जारी रहेगी। संस्कृति मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

‘सूत्र संतति’ का शाब्दिक अर्थ – ‘सूत की निरंतरता’ है। प्रदर्शनी के शीर्षक के रूप में, यह भारतीय संस्कृति और समाज में चल रहे संवादों का एक रूपक है, जो इसके विकास को आकार देता है और अतीत को भविष्य के साथ जोड़ता है। इस प्रदर्शनी में 75 प्रमुख कारीगरों, शिल्पकारों, डिजाइनरों और कलाकारों के 100 से अधिक वस्त्र प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

यह प्रदर्शनी लवीना बालडोटा द्वारा क्यूरेट की गई है। इसमें शिल्प कौशल और पारिस्थितिक संरक्षण को मुख्य विशेषता के तौर पर दर्शाया जा रहा है। हाथ से बुनाई, कढ़ाई, रेसिस्ट-रंगाई, छपाई, पेंटिंग और एप्लिक की प्रक्रियाओं के साथ-साथ सूत और फैब्रिक के अन्य रूपों के साथ बनाए गए वस्त्र भी देखने के लिए रखे गए हैं। इन्हें बनाने में लगे रेशों में स्थानीय किस्में जैसे कंडू और काला कपास, शहतूत और जंगली रेशम, ऊंट और भेड़ की ऊन, बकरी और याक के बाल शामिल हैं। प्रदर्शनी में प्रदर्शित सामग्रियों का उद्देश्य, भारत के आत्म-मूल्य और निहित सामूहिक, सहयोगी प्रयासों जैसे राष्ट्र को परिभाषित करने में जैविक और धीमी उपभोक्तावाद के आदर्शों को बढ़ावा देना है, जो ऐसे लक्ष्यों की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक हैं।

प्रतिभागियों की मुख्य विशेषताएं शामिल हैं:

कारीगर: वसीम (अरी, कानी और हाथ से बुने हुए पश्मीना जामवार के साथ पेंट की गई कलमकारी); विजय गुलेद (इल्कल), शून्य (बाटिक – टैगोर कविता)

संगठन / गैरसरकारी संगठन – आशा राहुल जैन द्वारा (अंजना सोमानी के संग्रह से); मनीष सक्सेना द्वारा आद्यम; करिश्मा स्वाली द्वारा चाणक्य स्कूल ऑफ क्राफ्ट; गुड अर्थ; मालविका शिवकुमार और जीन-फ्रैंकोइस लेसेज द्वारा वस्त्रकला

भाग लेने वाले फैशन और टेक्सटाइल डिज़ाइनर, कॉट्यूरियर और बहुविषयक कलाकारों में शामिल हैं: अबू संदीप, अशदीन, अंजुल भंडारी, आशीष शाह, गौरव गुप्ता, गौरंग शाह, मनीष मल्होत्रा, पीटर डी’अस्कोली, संजय गर्ग (रॉ मैंगो), स्मृति मोरारका, तरुण तहिलियानी।

वस्त्र पुनरुत्थानवादी: आसिफ शेख (सीडीएस), चार्ली मथलीना, दर्शन शाह (वीवर स्टूडियो), जेस्मिना जेलियांग (हीरलूम नागा), पूर्वी पटेल, राधिका राजे (बड़ौदा शालू), स्वाति और सुनैना, उमंग हुथीसिंग आदि।

वस्त्र कलाकार: अजय भोज, आशिता सिंघल (पैवंड स्टूडियो), जिग्नेश पांचाल, लक्ष्मी माधवन, प्रगति माथुर, पुष्यमित्र जोशी (इको फैब), सबिहा दोहदवाला और सुकन्या गर्ग।

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