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भाजपा अब आसनसोल से भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह को दे सकती है लोकसभा टिकट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट पर भाजपा ने भोजपुरी स्टार पवन सिंह को टिकट दिया था लेकिन पवन सिंह ने वहां से चुनाव लड़ने से मना कर दिया। जिसके बाद पार्टी इस सीट पर किसी अन्य विकल्प की तलाश में जुट गई है। ऐसे में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बताया जा रहा है कि आसनसोल सीट से पवन सिंह की जगह भाजपा भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह को मैदान में उतार सकती है। बता दें कि आसनसोल सीट से तृणमूल कांग्रेस की तरफ से शत्रुघ्न सिन्हा को मैदान में उतारा गया है।

पहले पार्टी को दिया धन्यवाद फिर नाम ले लिया वापस

बता दें कि, भाजपा ने 2 मार्च को 195 लोकसभा सीटों पर कैंडिडेट्स के नाम अनाउंस किए थे। जिसमें आसनसोल सीट पर पवन सिंह को मैदान में उतारा गया था। इसके लिए पवन सिंह ने भाजपा को धन्यवाद दिया लेकिन कुछ समय बाद ही पवन सिंह ने अपना नाम वापस लेकर सबको चौंका दिया था। गौरतलब है कि आसनसोल झारखंड से सटा हुआ एक कोयला खदान वाला क्षेत्र है। जहां की बहुसंख्यक आबादी हिंदीभाषी है। फिलहाल इस सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा सांसद हैं। उनसे पहले बाबुल सुप्रियो को यहां से जीत मिली थी।

विपक्षी दल के नेता पवन सिंह की दावेदारी पर साध रहे थे निशाना

पवन सिंह को आसनसोल सीट पर BJP की तरफ से टिकट मिलने के बाद पवन सिंह के खिलाफ आरोपों की बाढ़ आ गई थी। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें महिला विरोधी और महिलाओं पर अत्याचार करने वाला बताने लगे। कुछ लोगों ने उनकी पत्नियों के मामलों को उठाया तो कई लोगों ने भोजपुरी इंडस्ट्री में उनके अश्लील गानों पर सवाल खड़े किए। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए पवन सिंह पर निशाना साधा। TMC के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने लिखा कि पवन सिंह ने अपने भोजपुरी गीतों और वीडियो में बंगाल की महिलाओं के प्रति अश्लील नजरिया दिखाया है। उधर, बाबुल सुप्रियो ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि पवन सिंह की उम्मीदवारी से साफ है कि बीजेपी बंगाल और यहां की महिलाओं के बारे में क्या सोचती है।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।