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भाजपा में शामिल होते ही तापस रॉय ने ममता बनर्जी पर किया हमला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस छोडने वाले पांच बार के विधायक तापस रॉय बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजुमदार व विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के हाथों उन्होंने पार्टी का झंडा थामा। इसके बाद तृणमूल सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा-‘बंगाल में शाहजहां शेख की सरकार चल रही है, जो संविधान और कानून व्यवस्था की बातें करती हैं, लेकिन हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नहीं मानती। मैं शांति वाले बंगाल की स्थापना के लिए भाजपा में आया हूं और अब मोदी परिवार के सदस्य बन गया हूं।

भाजपा में शामिल होने से पहले पार्टी की आइटी सेल के प्रमुख ब बंगाल इकाई के सह प्रभारी अमित मालवीय ने तापस रॉय को फोन कर शुभकामनाएं दी थीं। सुकांत ने तापस रॉय की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे साफ छवि वाले नेता हैं। वहीं सुवेंदु ने कहा कि भाजपा को तापस रॉय जैसे नेताओं की जरुरत है। दूसरी तरफ तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने तापस रॉय के भाजपा में शामिल होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। मालूम हो कि तापस रॉय ने गत सोमवार को तृणमूल की प्राथमिक सदस्यता छोड़ते हुए पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने विधानसभा सदस्यता छोडऩे के लिए भी त्यागपत्र दिया है, हालांकि तकनीकी कारणों से वह अभी तक मंजूर नहीं हुआ है।

कल भाजपा में शामिल होंगे पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय

कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय गुरुवार को भाजपा में शामिल होंगे। मंगलवार को न्यायाधीश का पद छोडऩे के बाद उन्होंने संवाददाता सम्मेलन कर खुद इसकी घोषणा की थी। बुधवार को अमित मालवीय ने न्यायाधीश गंगोपाध्याय से फोन पर बातचीत की।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।