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विपक्ष ने जगदीप धनखड़ के खिलाफ राज्यसभा में अविश्वास प्रस्ताव किया पेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक ने धनखड़ पर पक्षपातपूर्ण और ‘पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली’ का आरोप लगाया है। विपक्ष ने दावा किया कि वह सदन की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष का पक्ष लेते हैं। विपक्ष की आवाज दबाते हैं।

कल ही विपक्षी नेताओं के करा लिए गए थे हस्ताक्षर

इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए विपक्ष को 50 सांसदों के हस्ताक्षर की जरूरत थी। विपक्षी नेताओं का कहना है कि उन्होंने विपक्षी नेताओं के हस्ताक्षर कल (सोमवार) ही एकत्र कर लिए थे।

राज्यसभा के सभापति के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव

धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के बाद यह राज्यसभा के किसी सभापति के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव है। पिछले सत्र में विपक्ष ने इसी तरह की चिंताएं जताई थीं, लेकिन प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

इन पार्टी के सांसदों ने प्रस्ताव पर किए हस्ताक्षर

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी (AAP) और समाजवादी पार्टी (SP) सहित विपक्षी दलों ने सामूहिक रूप से प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे संविधान के अनुच्छेद 67 (बी) के तहत पेश गया है।

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कल तक के लिए स्थगित हुई राज्यसभा और लोकसभा

बता दें कि मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही के दौरान जमकर हंगामा हुआ। इसके बाद दोनों सदनों को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस कारण दोनों सदनों की पूरे दिन की कार्यवाही बाधित हुई।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।