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बहराइच में मारे गए हिन्दू युवक के पोस्टमार्टम में मिले हैवानियत के निशान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. इस समय देश में यूपी के बहराइच हिंसा की चर्ची चारों तरफ हो रही है। बहराइच हिंसा में जान गंवाने वाले रामगोपाल मिश्रा के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी गई थी। हत्यारोपियों ने रामगोपाल मिश्रा को मारने से पहले उसकी बुरी तरह पीटाई की। उसका चेहरा, गले और सीने में गोली के तकरीबन 35 छर्रे लगने के निशान मिले हैं। इसी बीच जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है वो सुन कर पैरों तले जमीन खिसक सकती है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ चौकाने वाला खुलासा

सूत्रों के अनुसार, 22 साल के रामगोपाल मिश्रा की हत्या से पूर्व उनके साथ जमकर बर्बरता की गई थी। करंट और हैमरेज से मौत होने का पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। उनकी बॉडी पर 35 छर्रे लगने के निशान भी मिले हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनके साथ उसे भरुआ कारतूस भीम भी मारी गई है। सिर, माथे व हाथ पर धारदार हथियार से हमले के निशान भी पाए गए हैं।

मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई बर्बरता

बहराइच जिले के महसी तहसील के महराजगंज में मूर्ति विसर्जन के दौरान रामगोपाल मिश्रा की बर्बर हत्या की गई, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। जानकारी के अनुसार, रामगोपाल को आरोपियों ने अगवा कर लिया और उसकी हत्या से पहले उसे बेदर्दी से टॉर्चर किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि रामगोपाल के पैरों के नाखून खींचे गए थे और उसे करंट भी लगाया गया था। उसकी आंखों के पास किसी नुकीली वस्तु से गहरे घाव किए गए थे, और गोली मारने से पहले उसे शारीरिक यातनाएं दी गईं। अत्यधिक खून बहने और करंट लगने के कारण उसे ब्रेन हेमरेज हुआ, जिससे उसकी मौत हो गई।

ये है पूरा मामला?

यह घटना बहराइच के हरदी थाना क्षेत्र के रेहुआ मंसूर गांव निवासी रामगोपाल के साथ हुई, जब वह दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के जुलूस में शामिल था। जुलूस महराजगंज बाजार से गुजर रहा था, तभी समुदाय विशेष के मोहल्ले से पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिससे जुलूस में भगदड़ मच गई। इसी बीच रामगोपाल का अपहरण कर उसकी हत्या की गई।

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साभार : इंडिया न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।