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सुप्रीम कोर्ट ने आप नेता सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका की खारिज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. मनी लॉन्ड्रिंग केस में आप नेता सत्येंद्र जैन को आज यानी सोमवार को बड़ा झटका लगा है। देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद आम आदमी पार्टी के पूर्व मंत्री को तत्काल सरेंडर करना होगा। सुप्रीम कोर्ट से सत्येंद्र जैन ने सरेंडर के लिए वक्त मांगा था लेकिन अदालत ने यह मांग भी नहीं मानी। अब उन्हें सोमवार शाम सरेंडर करना होगा।

जमानत नामंजूर, अब जाना होगा जेल

आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत की गुहार लगाई थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बेल नामंजूर करते हुए जैन को तुरंत सरेंडर करने को कहा है। उन्हें सोमवार शाम को ही जेल जाना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ से जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और पंकज मिथल ने फैसला सुनाया है। सत्येंद्र जैन के वकील ने शीर्ष अदालत से कहा कि मेरे मुवक्किल फिजियोथैरिपी से गुजर रहे हैं इसलिए उन्हें सरेंडर करने में समय लग सकता है। अदालत की पीठ ने इसे न मानते हुए उन्हें तुरंत सरेंडर करने को कहा गया है।

पूरा मामला समझिए

शीर्ष अदालत ने जैन की नियमित जमानत याचिका पर 17 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2023 को जैन को मेडिकल बेस पर अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद बार-बार जमानत की अवधि बढ़ाई गई। जैन ने मामले में उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करने के दिल्ली हाई कोर्ट के 6 अप्रैल 2023 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। ईडी ने जैन से कथित तौर पर जुड़ी चार कंपनियों के जरिए धन शोधन के आरोप में AAP नेता को 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। उसने भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत 2017 में जैन के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की एक FIR के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया था। जैन को सीबीआई की तरफ से दर्ज मामले में 6 सितंबर 2019 को निचली अदालत ने नियमित जमानत दे दी थी। जैन ने इन आरोपों से इनकार किया है।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।