शनिवार, सितंबर 19 2026 | 01:19:04 PM

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चीनी समकक्ष से हुई मुलाकात

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को लाओस के वियनतियाने में चिनी समकक्ष डोंग जून के साथ प्रतिनिधिमंडल की वार्ता की। इस मुलाकात के बारे में रक्षा मंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी।  इस बार एडीएमएम-प्लस के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में लाओस इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। जहां यह बैठक लाओस की राजधानी में 10 देशों के आसियान समूह और उसके कुछ वार्ता साझेदारों के सम्मेलन से हुई।

डोंग जून ने किया राजनाथ सिंह का स्वागत

चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने लाओस में 11वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम प्लस) के दौरान द्विपक्षीय बैठक के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का स्वागत किया। बता दें कि एडीएमएम-प्लस एक मंच है जिसमें 10 देशों का आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन) और इसके आठ संवाद साझेदार – भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय ने दी जानकारी

रक्षा मंत्रालय ने इस वार्ता को लेकर एक्स पर लिखा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियनतियाने में लाओ पीडीआर के रक्षा मंत्री जनरल चांसमोन चान्यालथ के साथ द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। बता दें कि भारतीय और चीनी सेनाओं ने पिछले महीने के अंत में डेमचोक और देपसांग में सैनिकों को पीछे हटाने की कवायद पूरी की थी। दोनों पक्षों ने लगभग साढ़े चार साल के अंतराल के बाद दोनों क्षेत्रों में गश्ती गतिविधियों को फिर से शुरू किया।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।