शनिवार, सितंबर 12 2026 | 05:38:02 AM

असम सरकार ने करीमगंज जिले का नाम बदलकर श्रीभूमि किया नाम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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गुवाहाटी. असम कैबिनेट ने बांग्लादेश की सीमा से लगे बराक घाटी में करीमगंज जिले का नाम बदलकर श्रीभूमि करने को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम सरकार ने बराक घाटी में स्थित करीमगंज जिले का नाम बदलकर श्रीभूमि करने का फैसला किया है। सरमा ने यहां पत्रकारवार्ता में बताया कि यह निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। उन्होंने कहा कि 100 साल से भी अधिक समय पहले कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर ने आधुनिक करीमगंज जिले को श्रीभूमि- मां लक्ष्मी की भूमि बताया था और आज असम मंत्रिमंडल ने हमारे लोगों की लंबे समय से की जा रही मांग को पूरा किया है।

क्या बोले असम सीएम?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम के सबसे दक्षिणी जिले करीमगंज के पुराने गौरव को बहाल करते हुए अब करीमगंज जिला श्रीभूमि है। अविभाजित भारत के वर्तमान भौगोलिक क्षेत्र को श्रीभूमि नाम देने वाले कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए असम कैबिनेट ने करीमगंज का नाम बदलकर श्रीभूमि जिला करने का फैसला किया है। यह निर्णय जिले के लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगा।

असम में आएंगे पीएम मोदी

राज्य में विकास की गति को बनाए रखने और असम में निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास को आकर्षित करने के लिए मंत्रिमंडल ने 24 और 25 फरवरी को असम निवेश और बुनियादी ढांचा शिखर सम्मेलन 2025 के आयोजन को मंजूरी दे दी है। इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग लेंगे।

कैबिनट के और फैसले क्या?

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधान के तहत तैयार असम विधानसभा की मतदाता सूची के आधार पर पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने की सुविधा के लिए मंत्रिमंडल ने असम पंचायत (संविधान) नियम, 1995 के नियम 12 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। राजस्व बढ़ाने, करदाताओं की सुविधा प्रदान करने और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने असम माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2024 को मंजूरी दे दी है। यह अध्यादेश असम माल और सेवा कर, 2017 में कुछ खंडों में संशोधन की अनुमति देगा ताकि अधिनियम में आवश्यक परिवर्तनों को उचित रूप से संशोधित और शामिल किया जा सके।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।