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मुल्ला बस्ती के कब्रिस्तान में मिला लगभग डेढ़ सौ साल पुराना शिवलिंग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के जौनपुर में कब्रिस्तान के बीच स्थित शिवलिंग को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। जहां आज इसी कड़ी में मुल्ला बस्ती के कब्रिस्तान में मिले प्राचीनतम शिवलिंग को लेकर जिला प्रशासन आज शिव लिंग के ऊपर टिन शेड लगा सकती है। शिवलिंग को लेकर लोगों का कहना है कि ये कई सौ साल पुराना है। जंगल का यह शिलालेख जो मुल्ला बस्ती में स्थित है पूर्व में लोग इसे महादेव के नाम से जानते थे। बता दें कि, शहर के मुस्लिम बहुल मुल्ला टोला मोहल्ला में घनी आबादी में कब्रिस्तान के बीच करीब डेढ़ सौ साल पुराना शिवलिंग है। इसको लेकर आज जिला प्रशासन टिन शेड लगा सकती है। साफ-सफाई कराकर हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों ने इस जगह को उक्त स्थान पर प्रकाश का प्रबंध करने के साथ ही भगवा ध्वज लगा दिया है।

यह है पूरा मामला

मजहब के मुस्लिम मुस्लिम मुल्ला बस्ती में स्थित 150 साल पुराने पुरातात्विक स्थल की चर्चा है। कब्रिस्तान के बीच स्थित इस धार्मिक स्थल को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस की गतिविधियां जारी हैं। साफा-सफाई के बाद हिंदूवादी समर्थकों ने भगवा ध्वज फहराया और पूजा-पाठ शुरू किया गया।

मामले को लेने के लिए गए मालदीव के प्रभारी अधिकारी मिथिलेश कुमार मिश्रा ने समुद्र तट को इसकी जानकारी दी और तुरंत फोर्स के साथ पहुंच गए। सिटी मजिस्ट्रेट इंद्रा नंदा सिंह, बिजनेसमैन आई.आई.पी.एस. सकैट सिटी एविवेट्रिव ने भी देररात मकबरे में प्रवेश का अवसर प्राप्त किया। कड़ी चौकसी के बीच लिंग और आसपास के स्थान की रात में ही साफ-सफाई प्रकाश व्यवस्था की व्यवस्था दी गई। इंदौर में रातभर पुलिस और पीएसी के जवानों पर निगरानी रखी जा रही है। शनिवार की सुबह पूरे शहर में चर्चा हुई। महादेव सेना सहित अन्य हिंदू धर्मावलंबियों का जमवड़ा होना लगा। दार्शनिक ने शिलालेख पर जलसंविधान व संविधान कर भगवा ध्वज लगाया। दिन भर लोगों की भीड़ लगी रही। संसाधनों पर सुरक्षा बल तैनात हैं। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) अरविंद कुमार वर्मा ने भी लिया मौका।

साभार : इंडिया न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।