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संभल जामा मस्जिद का सर्वे करने गई टीम पर मुस्लिमों ने किया पथराव, फूंके वाहन, तीन की मौत

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के संभल में रविवार को एक मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान भीड़ और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई। मुरादाबाद कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि कर दी है। उन्होंने बताया कि इस हिंसा में नोमान, बिलाल और नईम की मौत हुई है। हिंसा उस वक्त भड़की जब मुगलकालीन एक मस्जिद का अदालत के आदेश पर सर्वेक्षण किया जा रहा था। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद भगवान विष्णु के एक प्राचीन हरिहर मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। वहीं, अफवाह को रोकने के लिए इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है।

संभल की जामा मस्जिद सर्वेक्षण शुरू होने के लगभग दो घंटे बाद प्रदर्शनकारियों का एक समूह मौके पर जमा हो गया और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। इसमें कई अधिकारी घायल हो गए। एक पुलिसकर्मी और भीड़ में शामिल दो लोग भी घायल हो गए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। परिस्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। घटना के बाद कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

विष्णु शंकर जैन की ओर दायर की गई है याचिका

विष्णु शंकर जैन की ओर से दायर याचिका पर स्थानीय अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश दिया था। जैन का दावा है कि मस्जिद मुगल सम्राट बाबर द्वारा हरिहर मंदिर को तोड़कर बनवाई गई थी। क्षेत्र की सांप्रदायिक संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारी विशेष सावधानी बरत रहे हैं। 1976 में इसी मस्जिद में एक घटना हुई थी, जिसमें एक दूसरे समुदाय के एक व्यक्ति द्वारा इमाम की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद व्यापक हिंसा भड़की थी और एक महीने तक कर्फ्यू लगा रहा था।

मस्जिद कल्कि मंदिर से करीब 200 मीटर दूरी पर है

यह मस्जिद ‘कल्कि’ मंदिर से लगभग 150-200 मीटर की दूरी पर स्थित है। सत्तारूढ़ भाजपा ने पथराव की घटना की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी है कि कानून-व्यवस्था को भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर हुई हिंसा भाजपा, सरकार और प्रशासन द्वारा “चुनावी गड़बड़ी से ध्यान भटकाने” के लिए की गई थी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के दौरान “इलेक्ट्रॉनिक बूथ कैप्चरिंग” का भी आरोप लगाया और कहा कि अगर चुनाव आयोग ईवीएम की फोरेंसिक जांच करा सके तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

साभार : दैनिक जागरण

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