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गुजरात हाईकोर्ट ने राजकोट अग्निकांड को बताया मैन मेड डिजास्टर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

अहमदाबाद. गुजरात के राजकोट में भीषण अग्निकांड की घटना पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने टीआरपी गेम जोन में नौ बच्चों समेत 33 की मौत को मानव निर्मित त्रासदी कहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार समेत प्रदेश के चार बड़े महानगरों के निगम को तलब किया है। हाईकोर्ट के जस्टिस बीरेन वैष्णव और देवेन देसाई की बेंच ने कहा कि पीठ 27 मई यानी कल इस मामले की विस्तृत सुनवाई करेगी। पीठ ने कहा कि ऐसे गेम जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं। राजकोट गेम जोन हादसे में सामने आया है कि वहां पर कंस्ट्रक्शन वर्क चल रहा था, बेल्डिंग की जा रही थी। इस बीच भी गेम जोन में लोगों को एंट्री दी गई।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख

गुजरात हाई कोर्ट में विशेष न्यायाधीश बीरेन वैष्णव और देवेन देसाई की पीठ बैठी और तत्काल सुनवाई की गई। हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रिजेश त्रिवेदी और अधिवक्ता अमित पांचाल ने दलीलें दीं। वकील ने कोर्ट को बताया कि आग की घटना में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। फायर सेफ्टी के लिए पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश दिए हैं। फिर भी ऐसी त्रासदियां होती रहती हैं। वकीलों ने कोर्ट को बताया कि टीआरपी गेमिंग जोन के पास फायर सेफ्टी की एनओसी नहीं थी। इस मामले में अधिकारियों ने भी लापरवाही बरती है। इसके बाद पीठ ने सख्त टिप्पणी करते पूछा कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बने गेम जोन को किसने स्वीकृति दी थी?

निगमों से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट समेत अन्य नगर निगमों और राज्य सरकार को गेम जोन नियम और फायर नियमों का एक दिन के भीतर खुलासा करने का निर्देश दिया है। गुजरात उच्च न्यायालय ने अहमदाबाद शहर में सिंधुभवन, एसपी रिंग रोड और एसजी हाईवे पर गेम जोन को भी खतरनाक बताया है। कैसे बनता है ये गेम जोन? इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है? पीठ की कड़ी टिप्पणी के बाद अब हाईकोर्ट में 27 मई को आगे की सुनवाई होगी। इसमें निगमों की तरफ से बताया जाएगा उनके अधिकार क्षेत्र में किन शर्तों के साथ गेम जोन का संचालन हो रहा है।

सिटिंग जज से जांच की मांग

हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रिजेश त्रिवेदी ने मांग की कि मामले की जांच मौजूदा जज से कराई जाए। उन्होंने कहा कि राजकोट का गेमिंग जोन आवासीय भूखंडों पर बनाया गया है। वेल्डिंग और अन्य कार्य जारी होने के बावजूद लोगों को खेल क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति दी गई। टीआरपी के गेमिंग जोन में ज्वलनशील पदार्थ भी थे। हजारों लीटर डीजल का भंडारण किया गया था। प्रवेश और निकास का स्थान बहुत संकीर्ण था और आग लगते ही सड़क बंद कर दी गई। फायर पंप तो थे लेकिन उन्हें पैकिंग से बाहर तक नहीं निकाला गया।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।