सोमवार, सितंबर 14 2026 | 09:20:53 PM

भीषण गर्मी के कारण देश के सिर्फ 4 राज्यों में हुई 54 की मौत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. उत्तर भारत में आसमान से आग बरस रही है, जिससे लोगों का हाल बेहाल है। तापमान दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, जबकि केरल में मानसून ने दस्तक दे दी है। अब भीषण गर्मी जानलेवा बन गई है। हीटस्ट्रोक से 4 राज्यों में 54 लोगों की जान चली गई। ये मौतें बिहार, झारखंड, ओडिशा और नागपुर में हुई हैं।

ओडिशा में गुरुवार को 7 घंटे में 6 महिलाओं समेत 10 लोगों की हीटस्ट्रोक से मौत हो गई, जबकि पिछले 24 घंटे में लू ने बिहार में 21 लोगों की जान ले ली। झारखंड में पिछले 36 घंटे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि नागपुर में 24 मई से लेकर 30 मई के बीच 20 अज्ञात व्यक्तियों ने दम तोड़ दिया।

ओडिशा में 10 लोगों की गई जान

ओडिशा में सभी मौतें राउरकेला सरकारी अस्पताल में गुरुवार दोपहर 1.30 बजे से रात 8.40 बजे के बीच हुईं, जहां दिन का अधिकतम तापमान 44.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मृतक व्यक्तियों की उम्र 23 से 70 वर्ष और 6 महिलाओं की आयु 30 से 69 साल के बीच थी। इसे लेकर आरजीएच के निदेशक गणेश प्रसाद दास का कहना है कि मौत की वजह हीटस्ट्रोक हो सकती है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सही जानकारी मिल पाएगी।

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औरंगाबाद में 12 की मौत

बिहार में गुरुवार को अधिकतम तापमान 47.1 डिग्री सेल्सियस था। औरंगाबाद स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिले के अलग-अलग अस्पतालों में 20 लोग भर्ती थे, जिनमें से 12 लोगों ने हीटस्ट्रोक की वजह से दम तोड़ दिया। वहीं, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, अरवल, बेगूसराय और पटना में 9 की मौत हो गई।

भोजपुर में 3 मतदान कर्मियों ने तोड़ा दम

भोजपुर के डीएम महेंद्र कुमार ने कहा कि भोजपुर में हीटस्ट्रोक की वजह से तीन मतदान कर्मियों संजय कुमार, राजेश राम, मोहम्मद यासीन और एक होमगार्ड जवान हेम नारायण सिंह की मौत हो गई। होमगार्ड का जवान अचानक से बेहोश हो गया था और उसे सदर अस्तपाल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।

साभार : न्यूज24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।