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इंडिगो ने टर्किश एयरलाइंस के साथ समझौता किया समाप्त

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. तुर्की के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए भारत सरकार ने देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो को टर्किश एयरलाइंस से डैम्प लीज को छह महीने तक बढ़ाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया है. हालांकि, दिल्ली-इस्तांबुल और मुंबई-इस्तांबुल रूट पर फ्लाइटें अचानक बंद ना हो, इसके लिए DGCA ने इंडिगो को तीन महीने की अंतिम मोहलत दी है. यानी इंडिगो को तीन महीने के भीतर टर्किश एयरलाइंस के साथ करार खत्म करना होगा.

सरकर ने तीन महीने की ये आखिरी मोहलत तब दी है जब एक दिन बाद ही मौजूदा लीज एग्रीमेंट की अवधि खत्म हो रही थी. सरकार ने इंडिगो को यह मंजूरी इस शर्त पर दी है कि वह टर्किश एयरलाइंस के साथ अपना डैम्प लीज करार तय समय पर खत्म कर देगी. हाल ही में भारत सरकार ने टर्की की कंपनी  Celebi Airport Services India की सिक्योरिटी क्लीयरेंस रद्द की है. इस फैसले के बाद से ही यह अटकलें तेज हो गई थीं कि इंडिगो और टर्किश एयरलाइंस के डैम्प लीज रिन्यूअल को मंजूरी मिलना मुश्किल है.

भारत ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब टर्की ने भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव में पाकिस्तान का समर्थन किया है. इसके अलावा टर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई किया जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ सैन्य अभियानों में किया गया. इसी मद्देनजर भारत सरकार टर्की की कंपनियों की देश में मौजूदगी की समीक्षा कर रही है और कई मामलों में सख्त रुख अपना रही है.

इंडिगो को मिली अंतिम मोहलत

फिलहाल इंडिगो, टर्किश एयरलाइंस से डैम्प लीज पर दो बोइंग 777-300ER विमान ऑपरेट कर रही है, जिसकी अनुमति 31 मई 2025 तक दी गई थी. इंडिगो ने इसे छह महीने और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकृति नहीं दी. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने तीन महीने की एक बार की अंतिम मोहलत दी है. यानी अब यह लीज 31 अगस्त 2025 तक वैध रहेगी.

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DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि इंडिगो ने एक हलफनामा दिया है, जिसमें कहा गया है कि वह इस अवधि के भीतर टर्किश एयरलाइंस से डैम्प लीज खत्म कर देगी और भविष्य में इसको बढ़ाने के लिए कोई अनुरोध नहीं करेगी. डैम्प लीज व्यवस्था में एयरक्राफ्ट और पायलट व मेंटेनेंस की जिम्मेदारी लीज देने वाली कंपनी की होती है, जबकि कैबिन क्रू (केबिन स्टाफ) एयरलाइन खुद देती है.

साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।