रविवार, सितंबर 20 2026 | 08:55:40 AM

वक्‍फ संशोधन बिल पर वोटिंग के दौरान प्रियंका गांधी के न होने पर केरल के मुस्लिम संगठन ने की निंदा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

तिरुवनंतपुरम. वक्‍फ संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों में पास हो चुका है. अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर का इंतजार है. इसके बाद यह बिल कानून का रूप ले लेगी. संसद में वक्‍फ बिल पास होने के बाद इस मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है. दरअसल कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी लोकसभा में वोटिंग के दौरान मौजूद नहीं थी. वह केरल के मुस्लिम बहुल क्षेत्र से सांसद हैं. उनकी गैरमौजूदगी को लेकर केरल में बवाल मच गया है. एक अखबार ने उनकी इस हरकत पर उनकी आलोचना की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार केरल के एक प्रमुख मुस्लिम संगठन द्वारा संचालित एक मलयालम समाचार पत्र ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस नेता और केरल के वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी की संसद में वक्फ संशोधन बिल पर बहस के दौरान अनुपस्थिति “एक धब्बा” बनी रहेगी. दैनिक सुप्रभातम ने अपने संपादकीय में यह भी सवाल उठाया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिल पर बहस में भाग क्यों नहीं लिया.

अखबार ने क्या लिखा?

अखबार ने अपने संपादकीय में लिखा है, “वक्फ बिल बाबरी घटना के बाद संघ परिवार द्वारा मुसलमानों और देश की धर्मनिरपेक्षता पर सबसे बड़े हमलों में से एक है. उन विपक्षी नेताओं का धन्यवाद जिन्होंने आधी रात के बाद भी संसद में बहादुरी से बिल के खिलाफ लड़ाई लड़ी. साथ ही इसके खिलाफ मतदान किया. कांग्रेस और डीएमके सदस्यों का प्रदर्शन सराहनीय रहा.”

संपादकीय में आगे लिखा है, “वायनाड सांसद प्रियंका गांधी से देश को बड़ी उम्मीदें हैं. लेकिन पार्टी व्हिप के बावजूद वह संसद नहीं आईं. यह एक धब्बा बना रहेगा. जब बिल पर बहस हो रही थी, तब वह कहां थीं? यह सवाल हमेशा बना रहेगा. इसके अलावा विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उस बिल पर क्यों नहीं बोला जो देश की एकता को तोड़ता है? यह भी सवाल बना रहेगा.”

- Advertisement -

साभार : न्यूज18

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।