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भारतीय बंदरगाहों पर नहीं रुकेंगे पाकिस्तान के जहाज, आयात-निर्यात पर भी पूर्ण प्रतिबंध

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की ठान ली है। पहले भारत की तरफ से सिंधु जल समझौते को निलंबित किया गया और इसके बाद अटारी चेकपोस्ट बंद कर सभी पाकिस्तानियों को देश छोड़ने के लिए कह दिया गया। अब भारत ने पाकिस्तानी झंडे वाले शिप की देश में एंट्री पर भी बैन लगा दिया है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन में कहा गया है कि पाकिस्तानी झंडे वाले किसी भी शिप को भारतीय पोर्ट पर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही भारतीय शिप पाकिस्तान के पोर्ट पर डॉक नहीं करेंगे।

इंपोर्ट पर भी लगा था बैन

मंत्रालय के अनुसार, यह कदम भारतीय संपत्तियों, कार्गो और जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के हित में और भारतीय शिपिंग के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए भी किया गया है। नौटिफिकेशन के मुताबिक, यह आदेस तत्काल प्रभाव से लागू होगा और अगली सूचना तक जारी रहेगा। इसके पहले भारत ने पाकिस्तान के साथ होने वाले किसी भी इंपोर्ट पर रोक लगा दी थी। वाणिज्य मंत्रालय की एक अधिसूचना के अनुसार, ‘पाकिस्तान से आने वाले या निर्यात किए जाने वाले सभी सामानों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात या पारगमन, चाहे स्वतंत्र रूप से आयात योग्य हो या अन्यथा अनुमति प्राप्त हो, अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित रहेगा।’

डाक सेवाएं भी निलंबित

  • भारत सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तान से आने वाले किसी भी प्रकार के डाक और पार्सल सेवाओं पर भी रोक लगा दी है। डाक विभाग के अनुसार, हवाई या जमीनी दोनों मार्गों से आने वाले किस भी श्रेणी के मेल और पार्सल के आदान-प्रदान को निलंबित कर दिया गया है।
  • पहलगाम हमले के बाद भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान में काफी खौफ है। पाकिस्तान को डर सता रहा है कि भारत कभी भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। भारत सरकार ने इन फैसलों से पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।