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कांग्रेस के रूस के पाकिस्तान को जेएफ-17 फाइटर का इंजन देने का दावा निकला गलत

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नई दिल्ली. कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर हमलावर रहती है. हर दिन नए आरोपों के साथ वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलती है. लेकिन अकसर उसके आरोप फुस्स होते हुए नजर आते हैं. एक बार फिर ऐसा ही कुछ हुआ है. इस बार कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधने के लिए रूस-पाकिस्तान के कथित रक्षा सौदे को मुद्दा बनाया. लेकिन उनकी ‘मिसाइल’ हवा में ही फुस्स हो गई. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया था कि रूस पाकिस्तान को JF-17 लड़ाकू विमानों के लिए RD-93MA इंजन दे रहा है. हालांकि रूस ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. रूस का कहना है कि पाकिस्तान के साथ ऐसा कोई सहयोग नहीं हो रहा और ये रिपोर्टें झूठी हैं. रूस के RD-93MA इंजन से जुड़ी पहली खबर एक कम प्रमुख विदेशी मीडिया में आई थी. इसे बाद में अन्य मीडिया छापा. चैटGPT-स्टाइल स्टोरी ‘Admin’ के नाम से प्रकाशित हुई और इसमें JF-17 थंडर की जमकर तारीफ की गई.

दरअसल कांग्रेस ने इस कथित सौदे को लेकर मोदी सरकार की कूटनीति पर सवाल उठाए थे. लेकिन रूसी सूत्रों ने साफ कहा है कि ऐसी अफवाहें फैलाकर कोई भारत-रूस के रिश्तों में दरार डालना चाहता है. रूस ने कहा कि पाकिस्तान को इंजन सप्लाई करने का दावा बेबुनियाद है.

रूस ने किया सीधा खंडन

रूसी सूत्रों ने WION से कहा, “ऐसा कोई सहयोग पाकिस्तान के साथ नहीं हो रहा. यह रिपोर्ट झूठी है और इसका मकसद भारत-रूस के बीच मजबूत रिश्तों को नुकसान पहुंचाना है.” रूस ने यह भी कहा कि इस तरह की खबरें अकसर बड़े शिखर सम्मेलन या अहम मुलाकातों से पहले उभरती हैं.

दिसंबर में भारत आ रहे हैं पुतिन

भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन दिसंबर में होने वाला है. इस बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत यात्रा पर आएंगे. उन्होंने हाल ही में कहा था कि वह प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के लिए उत्सुक हैं. ऐसे समय में पाकिस्तान को लेकर अफवाह फैलना महज राजनीतिक शरारत माना जा रहा है.

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार बताए कि रूस, जो कभी भारत का भरोसेमंद साझेदार रहा, अब पाकिस्तान को JF-17 लड़ाकू विमान के लिए इंजन क्यों दे रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि यह पीएम मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति की नाकामी है.

अफवाह और राजनीति

रूस ने इंजन सप्लाई की बात से इनकार किया तो कांग्रेस का आरोप ठंडा पड़ गया. राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस मोदी सरकार को विदेश नीति पर घेरना चाहती थी, लेकिन तथ्य सामने आने के बाद मामला पलट गया.

भारत-रूस संबंधों की मजबूती

भारत और रूस के रिश्ते दशकों से भरोसे और रणनीतिक सहयोग पर आधारित रहे हैं. रक्षा, ऊर्जा और व्यापार इसमें अहम स्तंभ हैं. भारत ने रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदा है और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे प्रोजेक्ट दोनों देशों की साझेदारी के उदाहरण हैं.

व्यापार और सहयोग

भारत-रूस व्यापार 60 अरब डॉलर से ज्यादा है. ऊर्जा और फार्मा इसमें सबसे अहम सेक्टर हैं. रूस चाहता है कि भारत के कृषि और दवा क्षेत्र से आयात और बढ़े. इसी बीच, यूरैशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत जारी है.

कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस का आरोप तथ्यों के बजाय महज राजनीतिक बयानबाजी साबित हुआ. रूस के खंडन के बाद साफ है कि यह मुद्दा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस बिना पड़ताल के इस तरह के गंभीर आरोप लगाकर खुद अपनी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े नहीं कर रही?

साभार : न्यूज18

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