रविवार, सितंबर 20 2026 | 06:36:45 AM

सेल ने दुर्गापुर में डिफेंस कस्टमर कॉन्क्लेव-2025 का आयोजन किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने देश के रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कंपनी की रणनीतिक प्रतिबद्धता पर बल देते हुए, दुर्गापुर के अपने अलॉय स्टील्स प्लांट (एएसपी) में 4 जून, 2025 को सेल-डिफेंस कॉन्क्लेव – 2025 का आयोजन किया।

स्वदेशीकरण परियोजनाओं के लिए विशेष रक्षा-ग्रेड स्टील के प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में, सेल ने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs) के साथ गहन सहयोग को बढ़ावा देने और रक्षा क्षेत्र की उभरती आवश्यकताओं पर चर्चा करने के लिए सम्मेलन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण और आयात प्रतिस्थापन के विषयों पर केंद्रित था, जो भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत की पहल की ओर एक और कदम रहा।

ऑर्डिनेंस फ़ैक्टरिज समेत प्रमुख रक्षा प्रतिष्ठानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस कॉन्क्लेव के दौरान हुए विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया।

इस सम्मेलन में सेल के वरिष्ठ नेतृत्व ने अपने विचार रखे, जिसमें निदेशक (वाणिज्यिक) श्री वी.एस. चक्रवर्ती और राउरकेला स्टील प्लांट के प्रभारी निदेशक एवं दुर्गापुर और बर्नपुर स्टील प्लांट के अतिरिक्त प्रभारी निदेशक श्री आलोक वर्मा शामिल थे।

- Advertisement -

इस सम्मेलन के दौरान हुई चर्चा में, मैटेरियल स्पेसिफिकेशन में बेहतर तालमेल, स्वदेशी प्रौद्योगिकी अपनाने और महत्वपूर्ण रक्षा जरूरतों को पूरा करने में सेल की भूमिका के विस्तार की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

इस कार्यक्रम ने भारत के रक्षा विनिर्माण व्यवस्था में एक विश्वसनीय और रणनीतिक भागीदार के रूप में सेल की स्थिति की सुनिश्चित की। यही नहीं सेल ने रक्षा और सुरक्षा में देश की आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। सेल रक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए और अधिक मात्रा में आपूर्ति करने के लिए तैयार है।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।