रविवार, सितंबर 20 2026 | 06:36:44 AM

भारतीय भाषाएं, संस्कृति की और भारतीय संस्कृति भारत की आत्मा है : अमित शाह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में भारतीय भाषा अनुभाग का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव और सचिव, राजभाषा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज भारतीय भाषा अनुभाग की स्थापना के साथ ही राजभाषा विभाग एक सम्पूर्ण विभाग बन गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को विदेशी भाषाओं के प्रभाव से मुक्त कराने की दिशा में यह मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि हमारी सोचने, विश्लेषण करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया जब हमारी मातृभाषा में होती है तभी हमारी पोटेंशियल का भरपूर दोहन संभव है। श्री शाह ने कहा कि देश की सभी स्थानीय भाषाओं को ताकत देकर ही हम भारत को उसके चिरातन गौरवमयी स्थान पर पहुंचा सकते हैं।

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श्री अमित शाह ने कहा कि हमारी हर भाषा दूसरी भाषा के साथ पूर्णता के साथ जुड़ी है और सभी भाषाओं का विकास एक-दूसरे के बिना संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी सभी भाषा रूपी नदियां मिलकर भारतीय संस्कृति की गंगा बनती है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएं, हमारी संस्कृति की और हमारी संस्कृति भारत की आत्मा हैं। श्री शाह ने कहा कि भारतीय भाषा अनुभाग भारत की भाषाई विविधता को समाहित करते हुए, सभी भाषाओं को एक सशक्त और संगठित मंच प्रदान करेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमें सभी भाषाओं की भावना, समृद्धि और संवेदना को कम किए बिना टेक्नोलॉजी का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम भाषा के माध्यम से अंग्रेज़ी को हम पर थोपने की लड़ाई को ज़रूर जीतेंगे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।