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एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर हवाई उड़ाने हुई प्रभावित

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नई दिल्ली. इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम में अचानक तकनीकी खराबी आ गई. कुछ ही मिनटों में 200 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुईं, कई विमान रनवे पर रुके रहे, और सैकड़ों यात्री घंटों तक इंतज़ार करते रहे. Air India, IndiGo जैसी लगभग सभी प्रमुख एयरलाइनों ने पैसेंजर्स को संदेश भेजकर कहा कि ATC सिस्टम की तकनीकी दिक्कत के कारण उड़ानें देर से चल रही हैं.

अब सवाल उठता है कि आखिर ATC सिस्टम होता क्या है, इसके ठप होने से पूरा एयरपोर्ट कैसे ठहर जाता है और यह हवाई सुरक्षा के लिए कितना जरूरी है?

Air Traffic Control (ATC) यानी हवाई यातायात नियंत्रण प्रणाली वो ‘ब्रेन’ है जो आसमान में उड़ने वाले सभी विमानों को एक-दूसरे से टकराने से बचाता है. इसे आप ‘आसमान का ट्रैफिक पुलिस’ भी कह सकते हैं बस फर्क इतना है कि ये गाड़ियों का नहीं, बल्कि हजारों फीट ऊपर उड़ते विमानों का ट्रैफिक मैनेज करता है.

ATC का काम है कि कौन सा विमान कब उड़ान भरेगा, कौन कब उतरेगा, कौन कितनी ऊंचाई पर और किस दिशा में जाएगा और इन सबका हर सेकंड रियल-टाइम ट्रैकिंग और निर्देश देना.

कैसे काम करता है ATC सिस्टम?

ATC सिस्टम तीन मुख्य हिस्सों में काम करता है:

Radar और Sensors
ATC के पास हाई-टेक रडार और सैटेलाइट सिस्टम होते हैं जो हवा में मौजूद हर विमान की सटीक स्थिति (altitude, direction, speed) मॉनिटर करते हैं.

Controllers और Communication
हर फ्लाइट को ATC कंट्रोलर्स से रेडियो संपर्क बनाए रखना जरूरी होता है. वो बताते हैं कि विमान को किस दिशा में मुड़ना है, किस ऊंचाई पर रहना है और कब लैंड या टेकऑफ करना है.

Coordination System
अगर एक ही समय पर कई विमान टेकऑफ या लैंडिंग की लाइन में हैं, तो ATC उन्हें sequence में सेट करता है, ताकि कोई दुर्घटना या हवा में ‘near miss’ न हो. यानि ATC सिस्टम के बिना पूरा हवाई ट्रैफिक एक अनियंत्रित आकाश बन सकता है.

दिल्ली में क्या हुआ?

शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे के आसपास दिल्ली एयरपोर्ट के ATC सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी (technical glitch) आ गई. इस वजह से कुछ मिनटों के लिए फ्लाइट डेटा ट्रांसफर और रडार अपडेट रुक गया. यानी विमान उड़ान भरने या उतरने की अनुमति नहीं पा सके. इस दौरान 100 से ज्यादा फ्लाइट्स लेट हुईं, कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमान रनवे पर खड़े रहे और कुछ उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट्स पर डायवर्ट करना पड़ा.

एयर इंडिया, इंडिगो और विस्तारा ने यात्रियों को सोशल मीडिया पर सूचित किया कि ATC की तकनीकी दिक्कत से पूरे नॉर्थ रीजन में असर पड़ा है.

क्या हुआ जब सिस्टम ठप हुआ?

जब ATC सिस्टम डाउन होता है, तो विमान टेकऑफ या लैंडिंग नहीं कर सकते क्योंकि पायलट को कंट्रोलर से अनुमति (clearance) नहीं मिल पाती. जिसके कारण रनवे पर विमान लाइन में खड़े रह गए और एयरपोर्ट टर्मिनल्स पर पैसेंजर्स की भीड़ बढ़ती चली गई.

क्यों इतना जरूरी है ATC?

ATC सिर्फ उड़ानों को निर्देश नहीं देता, बल्कि वो देशभर के एयर ट्रैफिक को आपस में synchronize करता है. भारत में हर दिन करीब 7,000 उड़ानें होती हैं, जिनमें से लगभग 1,200 फ्लाइट्स दिल्ली से आती-जाती हैं. अगर एक एयरपोर्ट का सिस्टम रुकता है, तो उसका असर दूसरे शहरों जैसे मुंबई, जयपुर, लखनऊ, पटना, कोलकाता तक पहुंच जाता है. यानि ATC सिर्फ दिल्ली का सिस्टम नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्रीय हवाई नेटवर्क की रीढ़ है.

हाल ही में लगातार तकनीकी दिक्कतें

दिल्ली एयरपोर्ट पर यह दूसरा बड़ा तकनीकी झटका है.इससे पहले बुधवार को एयरपोर्ट के चेक-इन सिस्टम में थर्ड पार्टी नेटवर्क फेलियर हुआ था, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी. हालांकि, उसे कुछ घंटे में ठीक कर लिया गया था. लेकिन आज की समस्या ATC से जुड़ी थी, जो सीधे फ्लाइट ऑपरेशन को प्रभावित करती है. इसलिए असर बहुत बड़ा पड़ा.

कैसे टाला जाता है बड़ा हादसा?

ऐसी स्थिति में Backup Systems और Manual Procedures तुरंत एक्टिव किए जाते हैं. Delhi ATC में दो बैकअप सर्वर और मैनुअल डेटा सिस्टम होते हैं, जिन्हें सक्रिय करके ट्रैफिक को नियंत्रित किया गया. इसी वजह से, भले उड़ानें लेट हुईं, पर कोई दुर्घटना नहीं हुई.

साभार : जी न्यूज

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