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उनका शरबत पिएंगे तो मदरसे बनेंगे, हमारा शरबत पीने पर बनेगे गुरुकुल : बाबा रामदेव

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

देहरादून. पतंजलि के सह-संस्थापक रामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो में रामदेव कोल्ड ड्रिंक्स की तुलना ‘टॉयलेट क्लीनर’ से करते हैं। साथ ही वे दूसरी शर्बत कंपनियों पर तंज कसते हुए उन पर शरबत जिहाद करने का आरोप लगाते हैं। अब उनके इस वीडियो को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है। दरअसल,  पूरा मामला ये है कि, गुरुवार (3 अप्रैल, 2025) को रामदेव ने यह वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया। 10 मिनट के इस वीडियो में वे पतंजलि के शरबत का प्रचार करते नजर आ रहे हैं। इसे शेयर करते हुए रामदेव ने कैप्शन में लिखा, “ठंडा मतलब टॉयलेट क्लीनर और शरबत जिहाद का क्या है स्वदेशी सनातन सात्विक विकल्प।”

उसके शरबतों के पैसों से मस्जिद और मदरसे बनते हैं

एक तरफ ‘टॉयलेट क्लीनर’ का हल्ला है, वहीं दूसरी तरफ शरबत के नाम पर एक कंपनी है जो शरबत तो देती है लेकिन वो शरबत से जो पैसा मिलता है उससे मदरसे और मस्जिदें बनवाती है। ठीक है उनका मजहब है। लेकिन आप यदि वो शरबत पिएंगे तो मस्जिद और मदरसे बनेंगे और तो वहीं, अगर आप पतंजलि का गुलाब का शरबत पीते है तो गुरुकुल बनेगा, आचार्य कोलम बनेगा, पतंजलि विश्वविद्यालय, भारतीय शिक्षा बोर्ड आगे बढ़ेगा। इसलिए मैं कहता हूं ये शरबत जिहाद भी ,जैसे लव जिहाद और वोट जिहाद चल रहा है न, ऐसे शरबत जिहाद भी चल रहा है।

वीडियो हो रहा है वायरल

बाबा रामदेव के इस वीडियो के सामने आते ही इसका एक हिस्सा सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। अधिकतर लोग इस वीडियो की 42 सेकंड की क्लिप शेयर कर रहे हैं और इस पर अपनी आपत्ति जता रहे हैं। वायरल हो रहे इस वीडियो में बाबा रामदेव कहते हुए नजर आ रहे हैं कि, मैं आपको ये बातें इसलिए बता रहा हूं, क्योंकि गर्मी में प्यास बुझाने के नाम पर लोग ठंडा यानी ‘टॉयलेट क्लीनर’ पीते रहते हैं।

साभार : इंडिया न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।