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हमने पिछले 10 सालों में तीन लाख किलो ड्रग्स की जब्त : अमित शाह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 10 सालों में ड्रग्स के खिलाफ अपनी लड़ाई को काफी मजबूत किया है और इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि 2004 से 2014 के बीच लगभग 3 लाख 63 हजार किलो ड्रग्स जब्त किए गए थे, जबकि पिछले 10 वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 24 लाख किलो तक पहुंच गया है, जो कि सात गुना अधिक है।

2047 तक नशामुक्त करने का लक्ष्य

देश में ड्रग्स तस्करी की बढ़ती समस्या और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके पड़ने वाले प्रभावों से निपटने के लिए सरकार और सक्रिय हो गई है। आज नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की ओर से ड्रग तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर दिल्ली में एक रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। इस दौरान विशेष रूप से उत्तर क्षेत्र के आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इससे निपटने पर फोकस रहा। बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। 2047 तक देश को नशामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

इतने करोड़ रुपये का ड्रग्स जब्त

अमित शाह ने कहा कि यह उपलब्धि देश के पारिस्थितिकी तंत्र, जनता और अदालतों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर हम ड्रग्स की कीमत की बात करें, तो 2004-2014 में जब्त किए गए ड्रग्स का मूल्य लगभग 8,150 करोड़ रुपये था, जो 2014-2024 में बढ़कर 56,851 करोड़ रुपये हो गया है, यानी यह आठ गुना बढ़ा है।

विपक्ष के सवालों पर पलटवार

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग तंज कस रहे हैं कि ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है। मगर, ड्रग्स का उपयोग नहीं बढ़ रहा बल्कि सख्त कार्रवाई की जा रही है और उसका नतीजा यह है। हमने तंज को नजरअंदाज कर ड्रग के पूरे इकोसिस्टम को कानून हवाले करने का काम किया। हमने उससे जुड़े आतंक को भी उजागर किया। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।