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तमिलनाडु में बड़ा उलटफेर: लोकसभा में अब कांग्रेस से अलग बैठेंगे DMK सांसद, जानें क्यों आई रिश्तों में कड़वाहट

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तमिलनाडु चुनाव 2026 के बाद DMK और कांग्रेस गठबंधन टूटने पर लोकसभा में सांसदों की अलग बैठने की व्यवस्था।

चेन्नईशुक्रवार, 5 जून 2026

भारतीय राजनीति और खासकर दक्षिण भारत के सबसे मजबूत गठबंधनों में से एक—DMK और कांग्रेस की राहें अब आधिकारिक तौर पर जुदा हो चुकी हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में पैदा हुए नए राजनीतिक घटनाक्रमों का असर अब देश की संसद में भी दिखने लगा है। लोकसभा सचिवालय ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की उस मांग को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस सांसदों के बगल से हटकर अलग बैठने की व्यवस्था (Separate Seating Arrangement) मांगी थी।

क्यों टूटा वर्षों पुराना ‘गठबंधन धर्म’?

दरअसल, हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में बेहद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। तमिल सुपरस्टार सी. जोसेफ विजय की नई नवेली पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) ने 108 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया और दशकों पुरानी द्रविड़ राजनीति के वर्चस्व को चुनौती दी। बहुमत के आंकड़े (118) से थोड़ा दूर रहने पर, कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों के साथ चुनाव-पूर्व सहयोगी DMK को झटका देते हुए TVK को समर्थन दे दिया।

इसके बाद राज्य में विजय (TVK) के नेतृत्व में नई सरकार बनी और कांग्रेस भी उस सरकार और कैबिनेट का हिस्सा बन गई। इस कदम से DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता बेहद नाराज हैं। DMK के बड़े नेताओं ने खुले तौर पर कांग्रेस के इस कदम को ‘धोखाधड़ी’ और ‘पीठ में छुरा घोंपना’ करार दिया है।

कनिमोझी के पत्र के बाद लोकसभा स्पीकर ने दी मंजूरी

बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए DMK की वरिष्ठ नेता और सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अपनी पार्टी के सांसदों के बैठने की व्यवस्था बदलने का अनुरोध किया था। लोकसभा सचिवालय ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद अब संसद के आगामी सत्रों में DMK और कांग्रेस के सांसद अगल-बगल बैठे नजर नहीं आएंगे।

‘INDIA’ ब्लॉक की 8 जून की बैठक से DMK ने बनाई दूरी

इस कड़वाहट का असर राष्ट्रीय स्तर के विपक्षी मोर्चे पर भी पड़ा है। DMK ने साफ कर दिया है कि वह आगामी 8 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ‘INDIA’ गठबंधन की उच्च स्तरीय बैठक में शामिल नहीं होगी।

DMK के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद टी.के.एस. इलांगोवन ने कड़े शब्दों में कहा:

“अब हम ‘INDIA’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं। जब हमारे पूर्व सहयोगी ने ही राज्य में हमारे साथ विश्वासघात किया है, तो हमारे लिए इस गठबंधन में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसीलिए हम 8 जून की बैठक से दूर रह रहे हैं।”

कांग्रेस की सफाई: “राजनीति में कोई स्थायी दोस्त नहीं होता”

दूसरी ओर, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने अपने इस फैसले का बचाव किया है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि राजनीति में परिस्थितियां बदलती रहती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में DMK ने भी कांग्रेस से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ा था। कांग्रेस का कहना है कि राज्य में एक स्थिर सरकार देने और जनभावनाओं का सम्मान करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK को समर्थन दिया है। इतना ही नहीं, TVK ने आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपनी इकलौती सीट भी कांग्रेस को सौंप दी है, जो उनके मजबूत होते रिश्तों को दर्शाती है।

निष्कर्ष और भविष्य की राजनीति

तमिलनाडु की सियासत में DMK को इस वक्त तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि उनके कुछ अन्य छोटे सहयोगी दल भी अब TVK के पाले में जाने का मन बना रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के लिए ‘INDIA’ ब्लॉक को एकजुट रखना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है क्योंकि समाजवादी पार्टी (SP) जैसी अन्य क्षेत्रीय पार्टियों ने भी इस बिखराव पर कांग्रेस की रणनीति पर दबी जुबान में सवाल उठाए हैं।

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