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भारतीय सेना ने शौर्य, पराक्रम और संयम का परिचय देते हुए दिया पाकिस्तान को जवाब : राजनाथ सिंह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. भारत के रक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में ब्रह्मोस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग सेंटर का उद्घाटन किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दौरान अपने संबोधन में कहा, “आज ब्रह्मोस एकीकरण एवं परीक्षण सुविधा केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर, मुझे आपसे बात करके बहुत खुशी हो रही है। मैं व्यक्तिगत रूप से इसमें शामिल होना चाहता था। लेकिन, आप जानते हैं कि मैं क्यों नहीं आ सका। हम जिस स्थिति का सामना कर रहे हैं, उसे देखते हुए मेरे लिए दिल्ली में रहना महत्वपूर्ण था। इसलिए, मैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आपसे जुड़ रहा हूं…”

रक्षा मंत्री ने परमाणु परीक्षण का किया जिक्र

राजनाथ सिंह ने कहा, “आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस है। 1998 में इसी दिन अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हमारे वैज्ञानिकों ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था और दुनिया को भारत की ताकत दिखाई थी। वह परीक्षण हमारे वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, रक्षा कर्मियों और कई अन्य हितधारकों के अथक प्रयासों का परिणाम था।”

ऑपरेशन सिंदूर ने दिया जवाब

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जिन आतंकियों ने आतंकी हमला करके हमारी बहनों का सिंदूर मिटाया उसका जवाब ऑपरेशन सिंदूर ने दिया। भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर को पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचा ढहाने के उद्देश्य से लॉन्च किया था। हमने उनके आम नागरिकों को कभी निशाना नहीं बनाया था। मगर पाकिस्तान ने ना केवल भारत के नागरिक इलाकों को निशाना बनाया बल्कि मंदिर, गुरुद्वारा और गिरिजाघर पर भी हमले करने का प्रयास किया। भारतीय सेना ने शौर्य और पराक्रम के साथ-साथ संयम का भी परिचय देते हुए पाकिस्तान के अनेक सैन्य ठिकानों पर प्रहार करके करारा जवाब दिया है।

रावलपिंडी तक सुनी गई भारतीय सेनाओं की धमक

रक्षा मंत्री ने कहा, ”हमने केवल सीमा से सटे सैन्य ठिकानों पर ही कार्रवाई नहीं की बल्कि भारत की सेनाओं की धमक उस रावलपिंडी तक सुनी गई जहां पाकिस्तानी फौज का हेडक्वार्टर मौजूद है। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नया भारत है जो आतंकवाद के खिलाफ सरहद के इस पार और उस पार दोनों तरफ प्रभावी कारवाई करेगा।”

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।