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इस्पात मंत्रालय इस्पात के आयात के लिए एसआईएमएस, क्यूसीओ और एनओसी से संबंधित मुद्दों पर खुली चर्चा का आयोजन करेगा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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इस्पात मंत्रालय 19 अगस्त, 2025 को इस्पात कक्ष, उद्योग भवन, नई दिल्ली में इस्पात के आयात के लिए इस्पात आयात निगरानी प्रणाली (सिम्स), गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) और अनापत्ति प्रमाण पत्रों (एनओसी) से संबंधित मुद्दों पर खुली चर्चा का आयोजन करेगा। कंपनियां और संघ उपरोक्त विषयों से संबंधित अपने मुद्दे इस खुली चर्चा में प्रस्तुत कर सकते हैं। खुली चर्चा में भाग लेने के लिए, उपरोक्त तिथियों पर निश्चित समय प्राप्त करने हेतु tech-steel[at]nic[dot]in पर ईमेल भेजे जा सकते हैं।

ई-मेल में निम्नलिखित जानकारी शामिल की जा सकती है:

  1. कंपनी/संघ का नाम
  2. समस्या एसआईएमएस/एनओसी/क्‍यूसीओ/अन्य से संबंधित है
  3. प्रतिभागी का नाम और पदनाम (तीसरे पक्ष के प्रतिनिधित्व की अनुमति नहीं है)
  4. सिम्स/एनओसी आवेदन का संदर्भ, यदि कोई हो
  5. उद्योग एवं उत्पाद का प्रकार – ऑटो/एयरोस्पेस/दूरसंचार/रक्षा, आदि।
  6. संक्षेप में मुद्दा (अधिकतम 50 शब्द)
  7. नोडल व्यक्ति का संपर्क विवरण (मोबाइल नंबर और ई-मेल)

खुली चर्चा का आयोजन सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक किया जाएगा और विशिष्ट समय-सीमा की सूचना ईमेल द्वारा दी जाएगी। लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण प्रत्यक्ष रूप से आना संभव नहीं होगा और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक संगठन के एक प्रतिनिधि को ही अनुमति दी जाएगी।

कंपनी या संघ, इस्‍पात के आयात के लिए एसआईएमएस, क्यूसीओ और एनओसी से संबंधित समस्या के लिए निर्धारित समय प्राप्‍त करने के लिए 14 अगस्त, 2025 की दोपहर तक उपरोक्त ई-मेल पर अपना अनुरोध भेज सकते हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।