शनिवार, सितंबर 19 2026 | 03:09:18 AM

प्रतिबंध के बाद न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के बाहर एकत्रित हुई ग्राहकों की भीड़

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. शुक्रवार को सुबह-सुबह मुंबई के अंधेरी में एक बैंक के बाहर ग्राहकों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। ये भीड़ अपने-अपने बैंक खाते में जमा पैसा निकालने के लिए आए हुए हैं। लेकिन, जिन लोगों को इस मामले की जानकारी नहीं है, वो हैरान हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि बैंक के सभी ग्राहक एक साथ अपने खाते से पैसा निकालने के लिए बैंक पहुंच गए। जी हां, गुरुवार को आई एक खबर के बाद न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहक आज सुबह आनन-फानन में अपने खाते में जमा पैसे निकालने के लिए पहुंच गए। देखते ही देखते बैंक के बाहर ग्राहकों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई।

RBI ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर लगाए कई प्रतिबंध

बताते चलें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को मुंबई स्थित न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। इस प्रतिबंधों के तहत, बैंक के ग्राहक भी अपने खाते से पैसे नहीं निकाल सकते हैं। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक की मौजूदा नकदी की स्थिति को देखते हुए ग्राहकों द्वारा किसी भी राशि की निकासी पर भी रोक लगा दी है, चाहे उनका किसी भी तरह का खाता हो। चिंता की बात ये है कि आरबीआई ने बैंक पर अगले 6 महीनों के लिए बैन लगाया है और फिलहाल इसकी समीक्षा भी की जा रही है।

डिपॉजिट इंश्योरेंस क्लेम के तहत ग्राहकों को मिल जाएगी 5 लाख रुपये तक की राशि

कुछ खास शर्तों को ध्यान में रखकर डिपॉजिट पर लोन सेट ऑफ कर सकता है। इसके अलावा, ये बैंक अपने कर्मचारियों की सैलरी, किराये और बिजली बिल जैसी कुछ जरूरी कामों के लिए खर्च भी कर सकता है। RBI के निर्देशों के मुताबिक, न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक 14 फरवरी से बिना प्री-अप्रूवल के कोई भी लोन या एडवांस नहीं देगा। इसके अलावा, ये बैंक आज से न तो किसी ग्राहक का डिपॉजिट स्कीकार करेगा और न ही उनके खाते से पैसे निकालकर देगा। हालांकि, न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के सभी पात्र जमाकर्ता डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन से 5 लाख रुपये तक की अपने डिपॉजिट पर जमा बीमा दावा राशि हासिल करने के हकदार होंगे।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।