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इमरान मसूद ने पहले एक घंटे में इलाज करने की दी धमकी, फिर पलटे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश स्थित सहारनपुर में लोकसभा सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता इमरान मसूद ने अपने बयान को लेकर सफाई दी है. एक घंटे में इलाज कर देंगे वाले बयान को लेकर मसूद ने कहा कि वह महज एक जुमला था. एबीपी न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत में कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैं हिंसा का समर्थक नहीं हूं. वक्फ कानून को लेकर मेरी याचिका, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल है. जिस पर कल (15 अप्रैल को) सुनवाई है. मुझे पूरा भरोसा है कि कोर्ट हमारी सुनेगी और न्याय करेगी. सांसद ने कहा कि हम लोग संविधान को मानने वाले लोग हैं. अदालत का जो भी फैसला होगा उसका सम्मान करने वाले लोग हैं. मैं अभी भी कह रहा हूं कि जब हम सरकार में आएंगे इस कानून को खत्म करेंगे.

15 मिनट वाले बयान पर भी बोले मसूद

एक घंटे वाले बयान को लेकर इमरान मसूद ने कहा कि वह महज एक जुमला है, हम जो भी करेंगे कानून के दायरे में करेंगे और हम संविधान को मानने वाले लोग हैं. उन्होंने कहा कि मैं AIMIM के नेता अकबरुद्दीन के बयान (15 मिनट वाले) से सहमत नहीं हूं. मैंने जो बात कही है, उसके अंदर न कोई चेतावनी है, न कोई धमकी है. वह सिर्फ एक जुमले की तरह है. लोकतंत्र के भीतर हम हिंसा के हामी नहीं हैं. कांग्रेस नेता ने कहा कि यह लड़ाई मुसलमान की नहीं संविधान को बचाने की है. आज बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती पर हम प्रण लेते हैं कि हम उनके सपनों को साकार करेंगे. जो लोग उनके सपनों पर ग्रहण लगा रहे हैं, हम उनको साफ करेंगे.

मसूद ने क्या कहा था?

बता दें हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान मसूद ने कहा था कि दुआ करिए कि हम लोग आ जाएं. समंदर में तूफान बहुत है और जब तूफान हो तो उसका सामना बड़ा जहाज करता है कश्तियां नहीं कर पातीं. इसलिए आपसे कहना चाहता हूं ये कश्तियों की सवारी छोड़ कर जहाज की सवारी की तैयारी करिए.बस एक ही रास्ता है कोई और रास्ता नहीं है. और ये वादा आपसे करना चाहता हूं कि जिस दिन आ जाएंगे उस दिन घंटे भर के अंदर इसका इलाज भी करना जानते हैं.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।