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पवन कल्याण की पत्नी कोनिडेला ने तिरुपति में दान किये केश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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अमरावती. आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की पत्नी अन्ना कोनिडेला ने रविवार (13 अप्रैल) को तिरुमला मंदिर में अपने बाल अर्पित किए. मंदिर में बाल करते हुए उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं. उपमुख्यमंत्री की पत्नी ने यह फैसला अपने बेटे के सलामती की खुशी में लिया. पिछले सप्ताह उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और अन्ना कोनिडेला के बेटे के साथ एक दुर्घटना घट गई थी. आग में जल जाने के कारण वह झुलस गया था, जिसके बाद मां अन्ना कोनिडेला ने तिरुमला मंदिर में बेटे की सलामती के लिए मन्नत मांगी थी कि उनके बेटे के ठीक होने पर वह मंदिर में अपने बाल दान करेंगी.

सिंगापुर में आग में झुलस गया था उपमुख्यमंत्री का बेटा

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और अन्ना कोनिडेला का बेटा मार्क शंकर हाल ही में सिंगापुर में एक ‘समर कैंप’ में भाग लेने गया था, जहां पिछले सप्ताह मंगलवार (8 अप्रैल) को आग लग गई थी. इस घटना में मार्क शंकर बाल-बाल बच गया, लेकिन इस दौरान मार्क के हाथ और पैर झुलस गए थे. हालांकि, अब वो पूरी तरह से ठीक है. इस घटना के बाद मार्क शंकर की मां अन्ना कोनिडेला ने उसकी सलामती के लिए तिरुमला मंदिर में मन्नत मांगी थी, जिसे उन्होंने रविवार (13 अप्रैल) को पूरा किया.

जनसेना पार्टी ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की जनसेना पार्टी की ओर से जारी इसे लेकर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई. इसमें पार्टी ने कहा, ‘परंपरा को ध्यान में रखते हुए अन्ना ने पद्मावती कल्याण कट्टा में अपने बाल अर्पित किए और अनुष्ठान में भाग लिया.’ जनसेना पार्टी ने अन्ना कोनिडेला के बाल दान करने की फोटो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की है. पार्टी ने पोस्ट में लिखा, “श्रीमति अन्ना कोनिडेला ने तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाई. मंदिर में श्री वराह स्वामी के दर्शन के बाद अन्ना कोनिडेला ने पद्मावती कल्याण कट्टा में अपने बाल दान किए.

एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।